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किसान मार्च: सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल ये पर्चा, आम जनता से किसानों ने मांगी माफी

पर्चे में सबसे पहले तो शहरी लोगों से माफ़ी मांगी गई है और लिखा गया है, ‘माफ़ कीजिए! हमारे इस मार्च से आपको परेशानी हुई होगी।’

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Kapil Tiwari

Nov 30, 2018

Farmer Protest

Farmer Protest

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ राजधानी दिल्ली में किसानों ने एकबार फिर से आवाज बुलंद की है। कर्जमाफी और फसल की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग को लेकर दिल्ली में किसानों का बड़ा आंदोलन जारी है। किसान मुक्ति मोर्चा के द्वारा इस आंदोलन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से किसानों के एकत्रित किया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ किसानों का ये पर्चा

गुरुवार को दिल्ली के रामलीला मैदान से शुरू हुआ किसानों का मार्च आज संसद की तरफ कूच कर रहा है। इस बीच किसानों की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर एक पर्चा तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे किसान मुक्ति मोर्चा की तरफ से जारी किया गया है।

विपक्ष के कई नेताओं ने भी पर्चे को किया है शेयर

ये पर्चा गुरुवार रात से ही सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। विपक्ष के भी कई नेताओं ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए इस पोस्टर को शेयर किया है। इस पोस्टर में जो बात लिखी है वो आम लोगों के दिमाग पर सीधा असर डाल डाल रही है।

क्या लिखा है पर्चे में?

दरअसल, किसानों ने पर्चे में उन कीमतों का जिक्र किया है, जो किसान को फल, सब्जि और अनाज पर मिलती है, जबकि उन्हीं चीजों पर सरकार आम जनता से पैसा वसूलती है। हालांकि किसान मुक्ति मोर्चा ने इस पर्चे के जरिए जनता से माफी भी मांगी की है कि हमारे आंदोलन से आपको परेशानी हुई होगा, लेकिन हम दिल्लीवासियों को परेशान करने की मंशा से राजधानी में दाखिल नहीं हुए हैं। किसानों ने कहा है कि हम अपनी परेशानी सरकार को बताने आए हैं।

इन राज्यों से दिल्ली में जुटें हैं किसान

आपको बता दें कि किसानों की मांग है कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए और वहां किसानों के कर्ज़ और उपज की लागत को लेकर पेश किए गए दो प्राइवेट मेंबर्स बिल पारित करवाए जाएं। किसान मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में इस आंदोलन में आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य राज्यों से किसान यहां आए हैं।

'किसान मुक्ति मार्च' का आयोजन 'ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति' ने किया है, जिसमें 200 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं।