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वीरता पुरस्कार पाने वाली महिला अधिकारी लड़ रही नौकरी की लड़ाई

वीरता पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल मिताली मधुमिता को नौकरी बचाने के लिए SC का दरवाजा खटखटाना पड़ा है

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Shakti Singh

Aug 21, 2015

mitali madhumita

mitali madhumita

नई
दिल्ली। अफगानिस्तान में आत्मघाती हमलों के दौरान साहस का प्रदर्शन कर वीरता
पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी को अपनी नौकरी बचाने के लिए
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। 39 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल मिताली
मधुमिता ने समय से पहले हटाने और स्थायी कमीशन देने से इनकार करने के खिलाफ अपील की
है। वे 2000 में सेना में शामिल हुई थी और शादीशुदा है।

काबुल में बचाई
कईयों की जान

ले. कर्नल मिताली ने 2009 में काबुल में भारतीय दूतावास में एक
आत्मघाती हमले में अपनी जान जोखिम में डालते हुए कई लोगों की जान बचाई थी। 2010 तक
महिलाओं को भारतीय सेना में केवल पांच साल के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन आधार पर लिया
जाता था। इस सेवा को 15 साल तक बढ़ाया जा सकता था जिसके बाद उनकी सेवाएं रद्द हो
जाती थी। 2010 में ही दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सिस्टम को असंवैधानिक और अवैध करार
दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब पुरूष अधिकारियों के लिए कोई नियम नहीं है तो फिर
लैंगिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।




ट्रिब्यूनल ने भी पक्ष में
दिया फैसला

इस पर रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां केन्द्र की
ओर से शुरूआती सुनवाई में कहा गया कि महिलाओं को गैर युद्धीय क्षेत्र जैसे आर्मी
एजुकेशन कॉर्प्स में ही महिलाओं को स्थायी कमीशन दिया सकता है। इस साल फरवरी में
दिल्ली में आर्म्ड फॉर्सेज ट्रिब्यूनल ने ले. कर्नल मिताली को स्थायी पद देने का
आदेश दिया था। ट्रिब्यूनल ने 2014 के रक्षा मंत्रालय के निर्णय को खारिज कर दिया
था। मंत्रालय ने कहा था कि इससे पहले मिताली ने अर्जी देकर स्थायी कमीशन न देने की
अपील की थी।

हो चुकी है स्थायी कमीशन की सिफारिश
ट्रिब्यूनल ने कहाकि
लेफ्टिनेंट कर्नल ने इससे पहले स्थायी कमीशन लेने से इसलिए इनकार किया क्योंकि वह
अफगानिस्तान में तैनात थी और उनके वैवाहिक जीवन में समस्याएं आ रही थी।
परिस्थितियां वश से बाहर होने की हालत में सरकार ने निर्णय बदलने को मंजूरी दी है
और कमांडरों को ऎसे मामलों का मेरिट के आधार पर निपटारा करना चाहिए। ले. कर्नल के
कमांडर ने स्थायी कमीशन की सिफारिश की थी।

रक्षा मंत्रालय ने कर दिया
सेवामुक्त

ले. कर्नल मिताली का आरोप है कि रक्षा मंत्रालय ने उन्हें स्थायी
कमीशन देने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी और उनकी नियुक्ति पर स्टे ऑर्डर
ले लिया। इस दौरान मंत्रालय ने जजों के सामने सही दस्तावेज और तथ्य भी नहीं रखे।
स्टे ऑर्डर के आधार पर मंत्रालय ने आदेश जारी कर तुरंत प्रभाव से ले. कर्नल मिताली
को सेवामुक्त कर दिया जबकि उनके पास दिसंबर 2015 तक की प्रोविजनल नियुक्ति थी।

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