
mitali madhumita
नई
दिल्ली। अफगानिस्तान में आत्मघाती हमलों के दौरान साहस का प्रदर्शन कर वीरता
पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी को अपनी नौकरी बचाने के लिए
सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। 39 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल मिताली
मधुमिता ने समय से पहले हटाने और स्थायी कमीशन देने से इनकार करने के खिलाफ अपील की
है। वे 2000 में सेना में शामिल हुई थी और शादीशुदा है।
काबुल में बचाई
कईयों की जान
ले. कर्नल मिताली ने 2009 में काबुल में भारतीय दूतावास में एक
आत्मघाती हमले में अपनी जान जोखिम में डालते हुए कई लोगों की जान बचाई थी। 2010 तक
महिलाओं को भारतीय सेना में केवल पांच साल के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन आधार पर लिया
जाता था। इस सेवा को 15 साल तक बढ़ाया जा सकता था जिसके बाद उनकी सेवाएं रद्द हो
जाती थी। 2010 में ही दिल्ली हाईकोर्ट ने इस सिस्टम को असंवैधानिक और अवैध करार
दिया था। कोर्ट ने कहा था कि जब पुरूष अधिकारियों के लिए कोई नियम नहीं है तो फिर
लैंगिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।

Published on:
21 Aug 2015 12:05 pm
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