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अफजल की मौत को न्यायिक हत्या कहना सीमा लांघने जैसाः रेड्डी

पीवी रेड्डी की बेंच ने 2005 में अफजल को संसद पर हमले के एक मामले में दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी

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Puneet Parashar

Feb 27, 2016

Afzal Guru

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नई दिल्ली। अफजल गुरु को मौत का फैसला सुनाने वाली दो सदस्यीय बेंच के प्रमुख पीवी रेड्डी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की सकारात्मक आलोचना का स्वागत है पर अफजल की मौत को न्यायिक हत्या कहना सीमा लांघने जैसा है। बता दें कि रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज हैं और उन्हीं की बेंच ने 2005 में अफजल को संसद पर हमले के एक मामले में दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।

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गौरतलब है कि रेड्डी और पीपी नावलेकर ने अफजल की मौत के दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। हालांकि, बेंच ने शौकत हुसैन गुरु की मौत की सजा को 10 साल की कैद में बदल दिया था। इसके अलावा आरोपी एसएआर गिलानी और अफसान गुरु उर्फ नवजोत संधू को दोषमुक्त कर दिया था।

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मालूम हो कि हाल ही में JNU के कुछ स्टूडेंट्स ने UPA के शासनकाल में हुई अफजल गुरु की फांसी को न्यायिक हत्या करार दिया था और कहा था कि अफजल की उचित सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बाद यूपीए के शासनकाल में गृह और वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने भी संसद पर हमले में अफजल का हाथ होने पर गंभीर शक जाहिर किया था।


जस्टिस रेड्डी ने कहा है कि फैसला खुद बोल रहा है। जो लोग अफजल की शहादत दिवस मना रहे हैं, उन्हें आलोचना या टिप्पणी करने से पहले पूरा फैसला पढ़ना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की सकारात्मक आचोलना करना हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पहचान है, जो बोलने की स्वतंत्रता की भी रक्षा करती है।
उन्होंने कहा कि इसे न्यायिक फांसी करार देना सीमा पार करना है। आलोचना सभ्य और जनहित में होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो यह लोकतंत्र की जड़ों पर हमला हो सकती है, जिसका एक पिलर सुप्रीम कोर्ट भी है

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