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Unlock 1.0 : Haridwar को अगले साल होने वाले कुंभ का बेसब्री से इंतजार, धीरे-धीरे लौट रही रौनक

देश में coronavirus का कहर जारी Unlock 1.0 में हरिद्वार ( Haridwar ) के गंगा तट पर लौट रही रौनक होटलवालों पर सख्ती अभी जारी

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Kaushlendra Pathak

Jun 28, 2020

Haridwar Ganga River during Unlock 1.0

अनलॉक 1.0 में हरिद्वार पहुंच रहे हैं श्रद्धालु।

हर की पौड़ी (हरिद्वार) से हरीश मलिक मलिक की रिपोर्ट

नई दिल्ली। पिछले साल जून का पहला सप्ताह। हरिद्वार ( Haridwar ) के प्रसिद्ध घाट हर की पौड़ी पर परिवार के साथ पहुंचा तो खचाखच मिला। लबों पर हर-हर गंगे के साथ जनसैलाब का जोश देखते ही बनता। कमोबेश एक साल बाद गंगा मैया के उसी घाट पर कोरोनाकाल ( COVID-19 ) का साक्षी बना हूं। ज्यादातर चेहरे मास्क से ढके-छिपे जरूर हैं। पर मुश्किल समय में दिलों में इस पवित्र घाट पर पहुंचने की खुशी भी है। हर-हर गंगे का उद्घोष अजनबियों को भी परस्पर बांध लेता है और श्रद्धालु आंखों ही आंखों में बोल जाते हैं— देखा हमने कोरोना को हरा दिया।

हम यहां पहुंच गए। रफ्ता—रफ्ता ही सही मोक्षदायिनी की लहरों पर रौनक लौटने लगी है। सारे हरिद्वार को अगले साले होने वाले कुंभ का बेसब्री से इंतजार है। तब यह रौनक पूरे परवान पर होगी।
लॉकडाउन ( India Lockdown ) के कारण पिछले तीन माह से देशभर के श्मशान स्थलों की अलमारियों में रखीं या पेड़ों से लटकी हजारों अस्थियां गंगा मां के स्पर्श के इंतजार में थीं। अनलॉक—1 में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की अंतरराज्यीय सीमाओं पर पास की बाध्यता खत्म होने से लोग तीर्थनगरी हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। अभी बाहरी लोगों में स्नानार्थियों से ज्यादा वे लोग हैं, जो किसी परिजन के स्वर्गवासी होने के बाद अस्थि—विसर्जन, पिंडदान या अन्य कर्मकांडों के लिए यहां आ रहे हैं।

अनलॉक—1 के बावजूद उत्तराखंड सरकार ने सिर्फ चार घंटे की मोहलत दी है। यूपी और उत्तराखंड के बार्डर गुरुकुल नारसन पर ही हरिद्वार जाने वाले यात्रियों को रोक लिया जाता है। अस्थि—विसर्जन के लिए यदि कोई यहां देर शाम को पहुंचता है तो उसकी रात काली होना तय है। चार घंटे की अनुमति मिल भी जाए तो हरिद्वार में होटल—लॉज बंद मिलेंगे। तब रात सडक़ किनारे कार में ही गुजरेगी। इसलिए यहां सुबह चार—पांच बजे के बाद पहुंचना श्रेयस्कर है।

घाट पर बगैर मास्क के घूमने की सख्त मनाही-

तीर्थ नगरी के ब्रह्मकुंड पर अस्थि—विसर्जन के लिए सुबह से लोग अपने पुरोहितों के साथ पहुंच रहे हैं। हर—हर गंगे के समवेत स्वरों में लाउडस्पीकर पर लगातार गूंजती आवाजें कुछ खलल डालती हैं—'बगैर मास्क के घूमना सख्त मना है। घाटों पर जाने से पहले सैनेटाइज जरूर करें और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करें।' हालांकि इसकी पालना होती नहीं दिखाई देती। पुरोहित कन्हैयालाल और अविनाश शर्मा बताते हैं कि अस्थि—विसर्जन की अनुमति तो पिछले माह मिल गई थी, लेकिन लोग अभी कुछ दिनों से ही ज्यादा आने लगे हैं।

होटलवालों पर सख्ती

गंगा किनारे तीन होटलों में संपर्क किया कि कमरा न सही, सिर्फ स्नान के लिए वॉशरूम का सशुल्क इस्तेमाल करने दें—होटल संचालक साफ मना करते हुए बोले सीसीटीवी लगे हैं। किसी भी बाहरी को कुछ भी इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। होटल सील हो सकता है। तीन महीने से वैसे ही बिजनेस ठप है और इस साल पटरी पर आने की उम्मीद कम है। अब तो अगले साल मार्च में होने वाले कुंभ का इंतजार है।