Hunger Index: 11 राज्यों के 45 प्रतिशत लोगों ने लिया खाने के लिए उधार

Highlights.

- 56 फीसदी ने कहा, सितंबर- अक्टूबर की अवधि में भोजन खाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी

- लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर मुस्लिम और दलित आबादी पर पड़ा

- हर चार में एक दलित-मुस्लिम को खाना हासिल करने में पक्षपात का शिकार हुआ

 

नई दिल्ली.

कोरोना वायरस के कहर से सभी वाकिफ है। देशव्यापी लॉकडाउन की दुश्वारियां धीरे-धीरे सामने आ रही हैं। भूखे चेहरों कि चिंता को जाहिर करने वाले एक सर्वे ने चौंका दिया है। इसके अनुसार 11 भारतीय राज्यों के लगभग 45 फीसदी लोगों को खाने के लिए पैसे उधार लेने पड़े। लॉकडाउन लागू होने के बाद से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक की स्थिति जानने के लिए हंगर वॉच ने यह सर्वे किया।

मुस्लिम और दलित को खाने का टोटा

सर्वे के अनुसार लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर मुस्लिम और दलित आबादी पर पड़ा। हर चार में एक दलित-मुस्लिम को खाना हासिल करने में पक्षपात का शिकार हुआ। सामान्य वर्ग के हर दस में से एक व्यक्ति को भोजन तक पहुंचने में दिक्कत हुई। सामान्य श्रेणी की तुलना में दलितों के लिए पैसा उधार लेना 23 फीसदी ज्यादा जरूरी था। दलित आबादी के अनाज की कुल खपत 74 प्रतिशत तक कम हो गई।

4 हजार लोगों से बातचीत

हंगर वॉच संस्थान ने यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु व प. बंगाल के कमजोर समुदायों के 4,000 लोगों से बात कर यह रिपोर्ट तैयार की है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों ने चेताया कि आर्थिक गतिविधियां ठप होने से दुनिया के हर देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब लोगों को धन की कमी महसूस होगी और भुखमरी जोर पकड़ेगी। दुनिया के प्रमुख देशों ने समय से भुखमरी पर ध्यान नहीं दिया तो एक भयानक संकट पैदा हो सकता है।

COVID-19
Ashutosh Pathak
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