
ICMR rules out possiblity of COVID-19 airborne transmission
नई दिल्ली। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने रविवार को यह स्पष्ट कर दिया कि नोवल कोरोना वायरस हवा के जरिये फैलने वाला नहीं है। एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ICMR में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के प्रमुख डॉ. रमन गंगाखेडकरने ने इसके लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि अगर वायरस वास्तव में हवा के जरिये फैलता था, तो एक COVID-19 रोगी के सभी परिवार के सदस्यों में कोरोना वायरस फैल जाता, जब कि ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक प्रयोगों में अक्सर विपरीत राय होती है। वर्तमान में, भारत में 3374 कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले हैं, जिनमें से 277 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 77 की मौत हो चुकी है।
क्यों परिजन नहीं हुए संक्रमित
डॉ. गंगाखेडकर ने कहा, "हमें यह समझना होगा कि विज्ञान में प्रयोगों के परिणामस्वरूप और इसके विरुद्ध राय होती है। लेकिन हमें एक संतुलित, साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा। उदाहरण के लिए, यदि यह संक्रमण वास्तव में हवा के जरिये फैलता था, तो COVID-19 पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आने वाले सभी लोग और विशेषरूप से उसका परिवार भी पॉजिटिव होना चाहिए, क्योंकि सभी एक ही तरह के माहौल में रहे। जब रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, तो उनमें से कुछ बिना किसी को जाने कि क्या उनमें से किसी को COVID-19 है, 6-8 घंटे तक वहीं रहते हैं। इस दौरान संक्रमित व्यक्ति के नजदीक होने के बावजूद, ये सभी मरीज़ COVID-19 पॉजिटिव नहीं होते।”
उन्होंने कहा, "हमें यह समझना होगा कि कुछ निष्कर्ष प्रयोगों पर आधारित हैं। उदाहरण के लिए कुछ ने गोल्डबर्ग ड्रम के अंदर देखने की कोशिश की कि क्या यह वायरस हवा में फैल सकता है। लेकिन यह एक कृत्रिम ड्रम है। ड्रम में सस्पेंशन पार्टिकल साइज बहुत कम है। हमारी भाषा में, हम इसे जैविक व्यवहार्यता कहते हैं।"
हवा में फैलने की संभावना
कोरोना वायरस के वायु के जरिये प्रसारण की संभावना पर परस्पर विरोधी राय है। जहां डब्ल्यूएचओ ने शुरू में इस सिद्धांत को खारिज कर दिया था, इस क्षेत्र में अनुसंधान जारी है। उदाहरण के लिए, यूनिवर्सिटी ऑफ नेब्रास्का मेडिकल सेंटर के शोधकर्ताओं के एक समूह और नेब्रास्का विश्वविद्यालय के नेशनल स्ट्रेटेजिक रिसर्च इंस्टीट्यूट ने 11 कमरों से हवा के नमूने एकत्र किए, जहां 13 COVID-19 रोगियों का इलाज किया जा रहा था। उन्होंने पाया कि कमरों के अंदर से एकत्र किए गए वायु नमूनों के 63.2 फीसदी हिस्से में कोरोना वायरस की मौजूदगी थी।
29 मार्च को प्रकाशित डब्ल्यूएचओ के वैज्ञानिक संक्षिप्त विवरण के अनुसार, एयरबोर्न ट्रांसमिशन का तात्पर्य है कि बूंदें 1 मीटर से अधिक दूरी पर अन्य व्यक्तियों को तक पहुंच जाएं। COVID-19 उन विशिष्ट परिस्थितियों में हवा के जरिये फैल सकता है जिसमें एरोसोल उत्पन्न करने वाली प्रक्रियाओं का प्रदर्शन किया जाता है जिसमें एंडोट्रैचियल इंटुबैशन, ब्रोन्कोस्कोपी, कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन आदि शामिल हैं।
हाल ही में, यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इन्फेक्शिएएस डिसीज के निदेशक एंथोनी फौसी ने कहा कि COVID-19 के वायु के जरिये फैलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
Updated on:
05 Apr 2020 08:59 pm
Published on:
05 Apr 2020 06:26 pm
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