16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारत की लंबी छलांग, बनाया स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन

 इससे भारत भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा

less than 1 minute read
Google source verification

image

Shakti Singh

Apr 29, 2015

ISRO

ISRO

नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति की एक लंबी छलांग
लगाते हुए स्वदेशी तकनीक से तरल गैस आधारित क्रायोजेनिक इंजन विकसित कर लिया है।
इससे भारत भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा
मेंं यह जानकारी दी।

उन्होंने इस उपलब्धि को "मेक इन इंडिया" की दिशा में एक
नया मील का पत्थर बताते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों
की सराहना की। उन्होंने बताया कि मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)
ने तरल गैस आधारित इस क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह देश की
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संबंधी उपलब्धियों में एक है। यह इंजन पूरी तरह से स्वदेशी
तकनीक एवं स्वदेशी उपकरणों से तैयार किया गया है तथा इससे चार टन वजनी भारी
उपग्रहों के प्रक्षेपण के मामले में भी देश आत्मनिर्भर हो जाएगा।





उन्होंने
कहा कि भारत अब अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के मामले में विश्व के किसी भी देश से कम
नहीं रह गया है। दिसंबर 2016 में इस इंजन से युक्त राकेट द्वारा भारी उपग्रह का
प्रक्षेपण किया जायेगा। देश में अब विदेशी संस्थानों में काम करने वाले अंतरिक्ष
वैज्ञानिक लौटने लगे हैं। इसरो में हाल ही में तीन ऎसे वैज्ञानिक शामिल हुए हैं जो
वर्षो से विदेशी संस्थानों में काम कर रहे थे।

ये भी पढ़ें

image