
ISRO
नई दिल्ली। भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति की एक लंबी छलांग
लगाते हुए स्वदेशी तकनीक से तरल गैस आधारित क्रायोजेनिक इंजन विकसित कर लिया है।
इससे भारत भारी उपग्रहों के प्रक्षेपण के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा
मेंं यह जानकारी दी।
उन्होंने इस उपलब्धि को "मेक इन इंडिया" की दिशा में एक
नया मील का पत्थर बताते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों
की सराहना की। उन्होंने बताया कि मंगलवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)
ने तरल गैस आधारित इस क्रायोजेनिक इंजन का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह देश की
अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी संबंधी उपलब्धियों में एक है। यह इंजन पूरी तरह से स्वदेशी
तकनीक एवं स्वदेशी उपकरणों से तैयार किया गया है तथा इससे चार टन वजनी भारी
उपग्रहों के प्रक्षेपण के मामले में भी देश आत्मनिर्भर हो जाएगा।
Congratulations to our space scientists for the successful testing of our indigenous cryogenic engine.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 28, 2015The engine tested today will enable us to put satellites of up to 4 tons in geostationary orbit. A proud accomplishment.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 28, 2015Published on:
29 Apr 2015 02:10 pm
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