
नई दिल्ली। कहते हैं कि धरती को सुरक्षित रखने के लिए सभी को पौधे लगाने चाहिए। लेकिन कोई एक ऐसा शख्स जो पूरी धरती का ज़िम्मा दूसरों पर थोपने के बजाए खुद अपने कंधों पर रख ले। सुनने में यह बात काफी अजीब लग सकती है, जिस पर विश्वास करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। लेकिन यकीन मानिए ये बात 100 पर्सेंट सच है।
जी हां, है एक ऐसा शख्स जिसने धरती के साथ-साथ यहां रहने वाले जीवों की भी सुरक्षा का ज़िम्मा अकेले अपने कंधे पर ले रखा है। फरिश्ते के रुप में इंसानों में जन्मा यह शख्स कहीं बाहर का नहीं बल्कि हमारे हिंदुस्तान का ही है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं असम के जाधव पाएंग की। जिसने कोई दो-चार पौधे नहीं बल्कि पूरा जंगल बसा दिया।
1979 की बात है, जब असम में कुदरत ने अपना विकराल रुप पूरी दुनिया को दिखाया था। पाएंग बताते हैं कि उस वक्त की बाढ़ अपने साथ हज़ारों सांप भी ले आई थी। जो जून-जुलाई की भीषण गरमी को सहन नहीं कर पाए और उनमें से काफी सांप मर गए। लगातार मर रहे सांप, मानो पाएंग को अंदर ही अंदर मार रहे थे। न मरते हुए भी जाधव पाएंग अंदर ही अंदर मर रहे थे। उसी दिन उन्होंने तय किया कि वे इन जीवों के साथ-साथ इस धरती के लिए भी ऐसा काम करेंगे जो इस पूरी दुनिया में एक मिसाल कायम करेगी।
उस दिन से ही पाएंग ने बंजर धरती पर रोज़ाना एक पौधा लगाना शुरु कर दिया। जो धीरे-धीरे 35 साल बाद 1360 एकड़ जगह में एक घना जंगल बन गया है। लेकिन अच्छी बात ये है कि यह जंगल लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आज के दौर में इसे मोलई फॉरेस्ट के नाम से जाना जाता है। पाएंग के बसाए इस जंगल में अब न सिर्फ सांप बल्कि बंगाल टाइगर, राइनो, हाथी जैसे बड़े-बड़े जानवरों ने अपना ठिकाना बना लिया है। पाएंग को उनके जज़्बे के लिए 2015 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
Published on:
17 Nov 2017 03:23 pm
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