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जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष बने देश के पहले लोकपाल, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

न्यायाधीश पीसी घोष के रूप में मिला देश को पहला लोकपाल लोकपाल चयन समिति के निर्णय के बाद राष्ट्रपति की मुहर

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जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष बने देश के पहले लोकपाल, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल बन गए। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिनाकी चंद्र घोष के नाम पर मुहर लगा दी है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और कानून के जानकार मुकुल रोहतगी की चयन समिति ने शुक्रवार को उनका नाम तय किया था। चयन समिति ने उनकी फाइल को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा था। 19 मार्च को राष्ट्रपति ने पीसी घोष के नाम पर मंजूरी दे दी है।

लोकपाल का न्यायिक सदस्य

जस्टिस दिलीप बी भोसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी और अजय कुमार को लोकपाल का न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं गैर न्यायिक सदस्य के रूप में अर्चना रामसुंदरम , महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन , महेंद्र सिंह और इंद्रजीत गौतम हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रहे हैं घोष

उल्लेखनीय है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सदस्य मलिकार्जुन खड़गे ने उक्त बैठक का बहिष्कार किया था। पूर्व न्यायाधीश घोष 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य रहे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट से 27 मई 2017 को रिटायर हुए थे। 8 मार्च 2013 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश का पदभार ग्रहण किया था। लोकपाल सर्च कमेटी नेे घोष सहित कुल 10 लोगों के नामों की सूची बनाई थी।