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कठुआ गैंगरेप केस : SC ने जारी किया नोटिस, कहा- वकीलों को कोर्ट में पेश होने से कोई नहीं रोक सकता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी व्यक्ति, वकील या एसोसिएशन किसी भी दूसरे वकील को कोर्ट में पीड़िता या अभियुक्त के लिए साक्ष्य पेश करने से नहीं रोक सकता।

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नई दिल्ली । कठुआ गैंग रेप मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने संज्ञान में लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के विरोध प्रदर्शन के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया, जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, बार कॉउंसिल ऑफ जम्मू कश्मीर और कठुआ जिला बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम कुछ वकीलों द्वारा कठुआ मामला कोर्ट के समक्ष लाए जाने, वकीलों के चार्जशीट दाखिल करने और पीड़िता की वकील को केस रखने से रोकने की बात बताए जाने पर उठाया है।

वकीलों को कोर्ट में पेश होने से कोई नहीं रोक सकता : सीजेआइ

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआइ) ने साफ शब्दों मे कहा है कि कोई भी वकील या एसोसिएशन किसी भी दूसरे वकील को कोर्ट में पीड़िता या अभियुक्त के लिए साक्ष्य पेश करने से नहीं रोक सकता है। सीजेआइ ने कहा है कि यदि कोई वकील किसी व्यक्ति का केस स्वीकार करता है तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह उसके लिए कोर्ट में पेश हो और साक्ष्य प्रस्तुत करे। यदि इस मामले में कोई भी उसको रोकता है तो यह कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन माना जाएगा। हालांकि सीजेआइ ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।

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वकीलों के एक समूह ने कोर्ट में दाखिल की याचिका

आपको बता दें कि कठुआ गैंगरेप मामले में अभियुक्त को बचाने के लिए कुछ वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसके बाद 46 वकीलों के एक समूह ने सर्वोच्च न्यायालय में स्वतः संज्ञान लेने के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि 8 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए रेप जैसे जघन्य अपराध के मामले में जिस तरह से बार एसोसिएशन के कई वकीलों ने प्रदर्शन किया और क्राइम ब्रांच को आरोपपत्र दाखिल करने से रोका और बाद में जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन के सदस्यों ने समर्थन किया और पीड़ितों के परिवार के साथ-साथ उनके वकील को आरोपियों ने धमकाया।

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याचिका में डिटेल रिपोर्ट देने की मांग की गई

आपको बता दें कि याचिका में कहा गया है कि इस तरह के व्यवहार कानूनी प्रक्रिया के लिए घातक है, साथ ही उनके लिए जो कानून की नजर में सबके लिए बराबर का विश्वास रखता है। कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गई है कि जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, बार कॉउंसिल ऑफ जम्मू कश्मीर और DGP को नोटिस जारी कर डिटेल रिपोर्ट देने को कहा जाए।

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