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वामपंथियों पर पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बॉम्बे HC, सुनवाई के दौरान कैसे की मीडिया से बात

जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मृदुला भटकर की खंडपीठ ने कहा, 'पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है? मामला विचाराधीन है।' अदालत ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

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वामपंथियों पर पुलिस की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भड़का बॉम्बे HC, सुनवाई के दौरान कैसे की मीडिया से बात

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार को असहज स्थिति में डालते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने सोमवार को सवाल किया कि पुलिस पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर मीडिया को क्यों संबोधित कर रही है, जबकि मामला विचाराधीन है। जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस मृदुला भटकर की खंडपीठ ने कहा, 'पुलिस ऐसा कैसे कर सकती है? मामला विचाराधीन है।' अदालत ने एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

भीमा-कोरेगांव हिंसा के पीड़ित ने लगाई याचिका

खुद को कोरेगांव-भीमा जातिगत दंगों का पीड़ित बताने वाले याचिकाकर्ता सतीश एस गायकवाड़ ने एनआईए से घटना की जांच और पुणे पुलिस से इसकी जांच रोकने की मांग को लेकर एक पीआईएल दाखिल की है। अदालत ने पुलिस के कार्य को 'गलत' करार देते हुए कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय मामले को देख रहा है तो पुलिस दस्तावेजों के बारे में कैसे बता सकती है, जिसे इस मामले में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

सात सितंबर को होगी अगली सुनवाई

सरकारी वकील दीपक ठाकरे ने अदालत को भरोसा दिया कि वह इस मुद्दे पर संबंधित पुलिस अधिकारियों से चर्चा करेंगे और उनसे जवाब मांगेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की है। पुलिस ने जून में सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था। अगस्त में छापे के दौरान पी वरवर राव, वरनॉन गोंजाल्वेस, अरुण फरेरा, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को गिरफ्तार किया गया।

महाराष्ट्र एडीजी ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

गौरतलब है कि दूसरे चरण की 28 अगस्त की गिरफ्तारी को लेकर एक जनहित याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने 29 अगस्त को सुनवाई की। इसके दो दिन बाद 31 अगस्त को महाराष्ट्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक परमबीर सिंह ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने दस्तावेज दिखाए और दोहराया कि पांच गिरफ्तार कार्यकर्ताओं ने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के साथ मिलकर कथित तौर पर 'केंद्र सरकार को उखाड़ फेंकने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन को खत्म करने के लिए उनकी राजीव गांधी के तर्ज पर हत्या को अंजाम देने' की साजिश रची।