Mahavir Jayanti 2021: महावीर का जन्म चैत्र मास के 13वें दिन बिहार के कुंडग्राम (कुंडलपुर) के राज परिवार में हुआ था। इस दिन को देशृदुनिया में एक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है।
नई दिल्ली। जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थांकर भगवान महावीर का आज (25 अप्रैल) जन्म जयंती है। देशभर में इस दिन महावीर जयंती के तौर पर मनाया जाता है। महावीर का जन्म चैत्र मास के 13वें दिन बिहार के कुंडग्राम (कुंडलपुर) के राज परिवार में हुआ था। इस दिन को एक उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान महावीर जैन धर्म के उन 24 महापुरुषों में से हैं जिन्होंने तपस्या से आत्मज्ञान की प्राप्ति की थी।
उपराष्ट्रपति एम.एस. एम. वेंकैया नायडू ने महावीर जयंती के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा- मैं 'महावीर जयंती' के पुनीत अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। रविवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भगवान महावीर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 24वें तीर्थांकर भगवान महावीर के पंच महाव्रत विश्व में शांति, खुशहाली तथा व्यक्तिगत उत्कर्ष के लिए आज कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।
रविवार को जारी एक संदेश में उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने अहिंसा, करुणा और नि:स्वार्थ भाव की अपनी शिक्षाओं के माध्यम से सद्भाव और मानवता की प्रगति का प्रबुद्ध मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच घर में रहकर महावीर जयंती मनाने की अपील की। नायडू ने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी की स्थिति को देखते हुए इस त्योहार को घर पर रहते हुए और कोविड स्वास्थ्य तथा स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन करते हुए मनाया जाना चाहिए।
महान पैगंबरों में से एक हैं महावीर: नायडू
उपराष्ट्रपति नायडू ने कहा कि महावीर वास्तव में हमारे देश में सामाजिक सुधार और शांति के महानतम पैगंबरों में से एक हैं। यह त्योहार जैन समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है और भारत तथा पूरे विश्व में आध्यात्मिक उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। श्रद्धालुओं द्वारा पुण्य कार्य, स्तवनों का पाठ, रथ में भगवान का जुलूस और जैन मुनियों व साध्वियों द्वारा आध्यात्मिक उपदेश इस उत्सव के मुख्य आकर्षण हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आइए हम सभी भगवान महावीर की शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए कोरोना के खिलाफ साझा लड़ाई में अपने-अपने तरीके से योगदान दें। हम सभी इस विशेष पावन अवसर पर भगवान महावीर की शिक्षाओं को आत्मसात करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराएं और स्वयं को एक शांतिपूर्ण, सामंजस्यपूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण हेतु समर्पित करें।