
सरकार और देवस्थान विभाग भले ही वरिष्ठ नागरिकों को तीर्थयात्रा करवा कर वाहवाही लूट रहा हो, लेकिन हकीकत कुछ और है। विभाग में कर्मचारियों की कमी के चलते न तो मंदिरों और न ही विभाग की संपत्तियों की देखरेख ढंग हो पा रही है।
तीन वर्ष पूर्व विभाग ने मैनेजर, पुजारी और सेवागीर की भर्ती परीक्षा ली थी, लेकिन इसका परिणाम अब तक जारी नहीं हो सका। भर्ती अटकने का कारण राजनीति को माना जा रहा है जिससे अभ्यर्थियों को नौकरी की आस ही खत्म हो गई है। कर्मचारियों की कमी से ट्रस्टों का रजिस्ट्रेशन व उनका नियंत्रण का काम भी कम हो रहा है।
ये है स्थिति
कर्मचारियों की कमी के चलते आए दिन कई मंदिर समय पर नहीं खुलते हैं, वहीं मंदिरों में भोग व अन्य कार्यों को लेकर खींचतान चल रही है। एक ही पुजारी दो-दो मंदिरों का काम संभाल रहा है। कई जगह विभाग ने संविदा पर कर्मचारी लगा रखे हैं, जो मनमर्जी करते हैं। विभाग में 473 पद हैं जिनमें से 203 पद रिक्त हैं।
25 साल बाद निकली थी भर्ती
देवस्थान विभाग की ओर से राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार श्रेणी के मंदिरों में सेवा पूजा व प्रबंधन के लिए 25 साल के बाद वर्ष 2014 में मैनेजर, पुजारी व सेवागीर पदों की भर्ती निकाली थी। इससे पहले वर्ष 1989 में भर्ती हुई थी।
विभाग में कर्मचारियों की कमी है। इस संबंध में जानकारी सरकार को दे रखी है। - अशोक कुमार, कार्यवाहक आयुक्त, देवस्थान विभाग
हम जल्द ही भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। इससे मंदिरों की स्थिति में सुधार होगा। विभाग के अन्य पदों को भी भरा जाएगा। - राजकुमार रिणवा, देवस्थान राज्य मंत्री
Published on:
20 Mar 2017 01:56 pm
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