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मेघालयः खदान में फंसे 15 मजदूर बचाने में आई नई मुश्किल, पानी निकालने में फिर जुटा अग्निशमन दस्ता

मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिला स्थित कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को निकालने का अभियान अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है।
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नई दिल्ली

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Amit Kumar Bajpai

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Updated: 4 Jan 2019, 8:53 AM IST

शिलांग। मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिला स्थित कोयला खदान में फंसे 15 मजदूरों को निकालने का अभियान अभी भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा है। बृहस्पतिवार को इस अभियान में एक नई मुश्किल आ गई। इसके बाद ओडिशा का अग्निशमन दस्ता फिर से खदान के मुख्य द्वार के पास स्थित मार्ग से पानी निकालने के काम में जुट गया।

खदान में बीते 13 दिसंबर से 15 खनिक फंसे हुए हैं। हालांकि खदान में फंसे हुए खनिकों के के संबंध में अभी तक कोई जानकारी नहीं आई है। बचाव अभियान दल के प्रवक्ता आर सुसगनी ने कहा, "ओडिशा के अग्निशामक सुबह 10 बजे से रास्ते से पानी निकालने के काम में दोबारा जुट गए हैं, जिससे उन्होंने बुधवार को पानी निकाला था।"

उन्होंने कहा कि रास्ते में पानी का स्तर बुधवार को 1.4 फुट कम गया था, लेकिन गुरुवार की सुबह फिर बढ़ गया। उन्होंने कहा, "समस्या से निबटने के लिए अग्निशामक एक और पंप चलाएगा ताकि पानी निकालने के काम में तेजी आए।"

घटनास्थल कसान गांव शिलांग की राजधानी से 130 किलोमीटर दूर है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया लिमिटेड भी गुरुवार को पानी निकालने के लिए 100 हार्सपावर की उच्च क्षमता वाला समर्सिबल पंप का इस्तेमाल कर सकता है। बचाव अभियान में बचाव दल के 200 से अधिक लोग जुटे हुए हैं।

गौरतलब है कि बीते 13 दिसंबर को मेघालय की एक अवैध कोयला खदान के अचानक ढहने से 15 मजदूर फंस गए थे। 19 दिन बीत जाने के बाद भी 320 फीट गहरी संकरी अवैध खदान में फंसे मजदूरों से बाहर से कोई संपर्क नही हो सका हैं।

उनके जिंदा होने की संभावना नहीं के बराबर बची है। इतने दिन बीतने के बाद भी इस खदान से न तो पानी को हटाया जा सका और न ही फंसे हुए मजदूरों से संपर्क हो सका।

कई चुनौतियां हैं सामने

मुख्य खदान में 60 मीटर गहराई तक पानी भरा हुआ है। खदान के ढहने से नदी का पानी भी सुरंग में भर गया। इस प्रकार की संकरी सुरंग में 30 मीटर की गहराई तक ही गोताखोरी करने के लिए सुरक्षित सीमा होती है। इसलिए 30 मीटर तक खदान से पानी निकालना पड़ेगा। फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए कम से कम 30 मीटर गहराई तक पानी को हटाना हैं ताकि गोताखोर को खदान की सुरंग में गोताखोरी के दौरान कोई बीमारी नहीं हो हैं।

एनडीआरएफ व कोल इंडिया लिमिटेड के बचाव दल के गोताखोरों ने सुरंग में 3-3 घंटे तक पानी के भीतर में रिमोट से संचालित वाहन की सहायता से प्रयास किया लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। खदान में पानी भरने के अगले दिन से ही राष्ट्रीय आपदा एवं बचाव दल की एक टीम बचाव कार्यों में लगी हुई है।

खनन कार्यों के विशेषज्ञ जसवंत सिंह गिल ने कहा है कि राज्य सरकार व बचाव व राहत सेवा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के चलते यह स्थिति बनी हैं। इसके चलते बचाव कार्य बहुत धीरे चले हैं।