आधे से अधिक भारतीयों में कोरोना से मौत और नौकरी खोने का डर

- बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी भारतीयों की चिंता बढ़ी।
- यह खुलासा यूगोव के पब्लिक मॉनिटर सर्वे में हुआ है। यूगोव ने यह सर्वे कोविड-19 पब्लिक मॉनिटर के तहत मई 202० में भी किया था।

नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से लोगों के मन में मौत और नौकरी खोने का डर बढ़ गया है। करीब दो तिहाई शहरी भारतीयों को गंभीर रूप से बीमार होने की चिंता सता रही है। उन्हें डर है कि वे कोरोना से संक्रमित होकर मौत का शिकार हो सकते हैं। दूसरी लहर में सरकार व हैल्थकेयर सिस्टम पर भी लोगों का भरोसा कम हुआ है। यह खुलासा यूगोव के पब्लिक मॉनिटर सर्वे में हुआ है। यूगोव ने यह सर्वे कोविड-19 पब्लिक मॉनिटर के तहत मई 2020 में भी किया था।

पहली से दूसरी लहर में ज्यादा डर -
देश में मार्च-अप्रेल में संक्रमितों को हॉस्पिटल में बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर जैसी आवश्यक सुविधाएं मिलने में मुश्किल हो रही थी। दूसरी लहर के पीक पर होने से लोगों का परिवार, दोस्तों, सरकार, हैल्थकेयर सिस्टम और मीडिया से भरोसा और कम हो गया, जबकि पहली लहर में इतना नहीं घटा था।

वैक्सीनेशन के लिए 76 प्रतिशत तैयार-
दूसरी ओर जब कोरोना वैक्सीन रोलआउट हुई तो उस समय देश में सिर्फ 67% लोग ही वैक्सीनेशन के लिए सहमत थे। दूसरी लहर जब अप्रेल-मई में पीक पर थी तो उस समय वैक्सीन के लिए 76% लोग सहमत थे।

खुद के संक्रमित होने की बढ़ गई आशंका-
देश में कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से अप्रेल 2021 में संक्रमण तेजी से बढऩे लगा। ऐसे में लोगों के मन में कोरोना के लंबे समय तक रहने, लॉकडाउन की वजह से आर्थिक स्थिति बिगडऩे, बच्चों की पढ़ाई बंद होने जैसी आशंकाएं तेजी से बढ़ गईं। मई 2020 में 45 फीसदी शहरी भारतीयों में कोरोना संक्रमित होने का डर था, जो मई 2021 में स्वास्थ्य सुविधाएं बेपटरी होने पर 64 फीसदी बढ़ गया।

coronavirus
विकास गुप्ता
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