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9 साल बाद 26/11 हमले के चश्मदीद मोशे की हुई घर वापसी, मां-बाप की हो गई थी मौत

मोशे होल्टेजबर्ग 18 जनवरी को पीएम मोदी, पीएम नेतन्याहू के साथ चाबाड हाउस में एक मेमोरियल का उद्घाटन करेगा।

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Kapil Tiwari

Jan 16, 2018

moshe holtzberg

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नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 6 दिन के भारत दौरे पर हैं। मंगलवार को उनके दौरे का तीसरा दिन है। पीएम नेतन्याहू के अलावा जिसका इंतजार भारत में सबसे ज्यादा किया जा रहा था वो था 11 साल का बच्चा मोशे, जो कि पिछले 9 साल से इजरायल में रह रहा था। मोशे होल्त्जबर्ग मंगलवार सुबह मुंबई एयरपोर्ट पर पहुंचे। आपको बता दें कि मोशे होल्त्जबर्ग वहीं बच्चा है, जिसमें जिसने 26/11 मुंबई हमले में अपना माता-पिता को खो दिया था। उस वक्त मोशे की उम्र करीब 2 साल थी। मुंबई हमले में अपने माता-पिता को खो देने के बाद मोशे इजरायल में अपने नाना-नानी के साथ रह रहा था। मुंबई भी मोशे अपने नाना के साथ आए हैं।

मुंबई में मोदी और नेतन्याहू के साथ मेमोरियल का उद्घाटन करेंगे मोशे
मोशे होल्त्जबर्ग 2008 में हुए मुंबई धमाकों का चश्मदीद है, क्योंकि उस वक्त 2 साल के उस बच्चे ने उस आतंकी हमले में अपने माता-पिता को खोया था। 9 साल के बाद मोशे होल्ट्सबर्ग मुंबई अपने घर लौट आया है। मुंबई में मोशे इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मोशे मुंबई में एक मेमोरियल का उद्घाटन करेगा। मोशे और इजरायल के प्रधानमंत्री 17 जनवरी को मुंबई में रहेंगे। इसके बाद अगले दिन 18 जनवरी को पीएम मोदी, पीएम नेतन्याहू के साथ मोशे भी चाबाड हाउस का दौरा करेगा। मोशे अपने दादा रब्बी होल्ट्सबर्ग नाचमन के साथ मुंबई आया है। इस दौरान मोशे के नाना ने मीडिया से बात करके बताया कि मोशे यहां वापस आकर बहुत खुश है, मुंबई अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित जगह है। संवाददाताओं से बातचीत में नाचमन ने कहा, 'यह बहुत खास दिन है। ईश्वर का धन्यवाद कि मोशे दोबारा लौट सका। मुंबई अब काफी सेफ है।'

मोशे ने मोदी से की थी मुंबई आने की भावुक अपील
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब इजरायल की यात्रा पर गए थे तो वहां उन्होंने मोशे होल्ट्सबर्ग से मुलाकात की थी और उसे भारत आने का न्यौता दिया था। मोशे ने पीएम मोदी से उस दौरान अपनी पढ़ाई को मुंबई में पूरा करने की इच्छा जताई थी। मोशे ने कहा था कि वो मुंबई में रहकर अपने आगे की पढ़ाई पूरी करना चाहता है।

क्या है मोशे की कहनी
26 नवंबर 2008 में मुंबई हमलों के दौरान ही आतंकियों ने एक यहूदी केंद्र को भी निशाना बनाया था, जिसमें मोशे के माता-पिता की मौत हो गई थी और मोशे इस हमले में जिंदा बच गया था। मोशे की जान उस वक्त भारतीय मूल की ही उनकी रिश्तेदार नैनी सैंड्रा सैमुअल्स ने बचाई थी। मोशे की जान बचाने के लिए सैंड्रा को इजरायली सरकार ने 'राइटियस जेनटाइल' के अवॉर्ड से नवाजा था, यह गैर- यहूदियों को दिया जाने वाला सबसे सर्वोच्च पुरस्कार है। मुंबई हमले के समय वह दो वर्ष का था। नरीमन हाउस और ताज होटल समेत अन्य जगहों पर हुए हमलों में 166 लोगों की मौत हो गई थी।