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नागा शांति समझौता: जानिये क्या हैं महत्वपूर्ण बातें

समझौता तैयार हो जाने के बाद नागा सशस्त्र समूह विघटित हो जाएंगे और या केंद्रीय या राज्य सरकार के सुरक्षा बलों में शामिल कर लिया जाएगा।
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नई दिल्ली

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Siddharth Priyadarshi

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Updated: 26 Apr 2018, 1:46 PM IST

naga peace accord

नई दिल्ली। देश के सबसे पुराने सशस्त्र विद्रोह को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार और नागा सशस्त्र समूहों ने शांति एक समझौते को अंतिम रूप दिया दे है। संसद के मानसून सत्र से पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।

अफ्सा हटाने से लेकर राज्य के लिए अलग झंडे की मांग

नागा समूहों और केंद्र सरकार के बीच ये समझौते अरुणाचल और मणिपुर में स्वायत्त नागा क्षेत्रीय परिषदों और इन राज्यों में नागा समुदाय के लिए सामान्य सांस्कृतिक निकाय, नागा मिलिशिया के एकीकरण और पुनर्वास, सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां देने सम्बन्धी अफ्सा अधिनियमों (एएफएसपीए) और नागालैंड में दो सदनों वाले सदन को हटाने जैसे मुद्दों को संबोधित करेंगे।

बताया जा रहा है कि एक बार समझौता तैयार हो जाने के बाद नागा सशस्त्र समूह विघटित हो जाएंगे और या केंद्रीय या राज्य सरकार के सुरक्षा बलों में शामिल कर लिया जाएगा। जाएंगे। जो अलगाववादी कार्यकर्त्ता इन सेनाओं में सेवा के योग्य नहीं हैं उन्हें सरकार द्वारा उचित रोजगार दिया जाएगा। हालांकि इस मसौदे में शांति समझौते के अहम घटक के रूप में अफ्सा को हटाने का भी प्रावधान है लेकिन इस बारे में अभी भी आपत्तियों को संबोधित करने की जरूरत है। रराज्य के लिए एक अलग ध्वज की भी मांग की गई है।

मानसून सत्र में लाया जाएगा विधेयक

नागा शांति समझौते में केंद्र के तरफ से मुख्य वार्ताकार रहे आर एन रवि ने कहा कि दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के बहुत करीब हैं। बता दें कि रवि ने अगस्त 2015 में नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) या एनएससीएन-आईएम के साथ समझौता किया था। उम्मीद जताई जा रही है कि संसद के मानसून सत्र से पहले इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की जरूरत है ताकि इसे लोकसभा चुनाव से पहले कार्यान्वित किया जा सके। संभव है कि इस अधिनियम में कुछ संवैधानिक संशोधन होंगे जिसके बाद यह राज्य विधान सभा द्वारा भी पारित होना होगा।

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