एक दशक पहले तक घरेलू उत्पादों में खिलौने, प्लास्टिक की बाल्टी, देवताओं की मूर्तियां व अन्य घरेलू सामान का ज्यादा हिस्सा भारतीय होता था। इनमें से प्रत्येक भारतीय कंपनी 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार देती थी, जो अब बंद पड़ी हैं। अब इस बाजार पर चीन का कब्जा है। सस्ते और बेहतर चीनी आयात ने घरेलू उद्योग को मिटा दिया है।