
नई दिल्ली। हमारे समाज में लड़कियों का पहनावा एक पसंदीदा और चर्चित विषय रहा है। लड़कियों को उनके प्रति हो रहे अपराधों के लिए भी उनके पहनावे को ही दोष दिया जाता है, भले ही कारण चाहे जो भी हों। समाज में महिलाओं के पहनावे को लेकर दो तरह की धारणाएं प्रचलित है एक तो पारंपरिक और दूसरा आधुनिक।
रूढ़ीवादी विचारधारा के अनुसार लड़कियों को पारंपरिक परिधान पहनने चाहिए। सिर से पांव तक ढ़का होना चाहिए। इसके विपरीत आधुनिक विचारधारा लड़का और लड़की में समानता लाने के दृष्टिकोण को अपनाते हुए कपड़ो को लेकर कोई भेद नहीं करता है। हाल ही में लड़कियों के पहनावे को लेकर फिर से चर्चा किया गया है और इसमें पहनावे को हार्माेन से जोड़ा गया है।
दरअसल मुंबई के गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक कॉलेज की प्रिंसिपल स्वाति देशपांडे लड़कियों के लिए एक खास चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लड़कियां अगर सलवार-कमीज पहनें तो उनके हॉर्मोन ठीक रहेंगे। स्वाति जी का कहना है कि आजकल लड़कियों में पॉलिसिस्टिक ओवेरियन डिजि़ज का होना एक सामान्य बात है और इसका कारण उनका पैंट-शर्ट पहनना ही है।
जब महिलाएं पुरुषों की तरह कपड़े पहनती हैं तो इसका प्रभाव उनके सोच और व्यवहार पर पड़ता है। वो भी ऐसे पोशाकों को पहनकर उनके जैसे ही व्यवहार करने लगती है और इस तरह लड़कियों के दिमाग में भी एक तरह का जेंडर रोल रिवर्सल हो जाता है। इस कारण लड़कियों में कम उम्र से ही रिप्रॉडक्शन की प्राकृतिक इच्छा कम होने लगता है और नतीजा है पॉलिसिस्टिक जैसे सिंड्रोम।
इसी कॉलेज की एक छात्रा का कहना है कि कॉलेज में लड़कियों को चोटी बनाकर आने के लिए भी दबाव डाला जा रहा है। इसके साथ ही कॉलेज के कैंटीन में भी नोटिस लगाया गया है कि सेक्सुअल हेरेसमेंट को रोकने के लिए लड़के और लड़कियां अलग-अलग ही बैठे।
इस बारे में डॉक्टर अंजलि छाबरा का कहना है कि पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का महिलाओं के पहनावे से कोई संबंध नहीं है।
Updated on:
04 Mar 2018 01:59 pm
Published on:
04 Mar 2018 01:52 pm
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