धीमे कोरोना वैक्सीनेशन के लिए प्राइवेट अस्पताल राडार पर

सरकार कोरोना पर नियंत्रण पाने के लिए लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन निजी अस्पतालों की सुस्ती टीकाकरण प्रक्रिया को धीमा कर रही है जो एक चिंता का विषय है। इस वजह से प्राइवेट अस्पताल राडार पर भी हैं।

नई दिल्ली। देश मे जब कोरोना वैक्सीनेशन शुरू किया गया तब लोगों ने लंबी लाइन में लगकर सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन लगवाने को प्राथमिकता दी और निजी अस्पताल लोगों की राह ही देख रहें हैं। कोरोना के कहर को रोकने के लिए सरकार अधिक से अधिक वैक्सीनेशन पर ज़ोर दे रही है। फिर भी निजी अस्पतालों में टीकाकरण की धीमी रफ्तार है, जिसे देखते हुए अब ये अस्पताल केंद्र सरकार के राडार पर आ चुके हैं।

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चिंता की बात है कि पूरे देश मे कोरोना के अब तक 31,025,875 केस आ चुके है और 412,563 लोगों की मौत हो चुकी हैं, हालांकि 30,176,306 लोग ठीक भी हुए हैं। वैक्सीनेशन की नई पॉलिसी के अनुसार केंद्र सरकार 75% डोज़ फ्री मे लोगों को लगाने के लिए सीधे राज्यों को दे रही है।

बची हुई 25% डोज़ प्राइवेट अस्पतालों को मिलती हैं और उन्हें इसका ऑर्डर राज्य सरकार के माध्यम से करना होता है। कोविशील्ड की कीमत जहां 600 रुपये, वहीं कोवैक्सीन की कीमत 1200 रुपये निर्धारित हैं। इसके ऊपर से प्राइवेट अस्पताल 150 रुपये वैक्सीन लगाने के लेते हैं। केंद्र सरकार का प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीनेशन की इस प्रक्रिया मे शामिल करने का एक ही कारण था, वैक्सीनेशन की गति बढ़ाना। लेकिन असल मे ऐसा हो नही रहा है।

कोरोना वैक्सीनेशन के आंकड़े

आंकड़ों के अनुसार भारत मे 14 जुलाई तक 39.1 करोड़ वैक्सीन डोज़ लगाई जा चुकी हैं। जुलाई 10 तक भारत मे 5.5% लोग ऐसे थे जिनके दोनों डोज़ लग चुकी थी और 22.2% लोगों को एक डोज़ लग चुकी है। पर हालात देखे जाए तो वैक्सीनेशन की यह गति काफी नहीं है।

क्या है चिंता का विषय

एक्सपर्ट्स का भी मानना हैं कि वैक्सीनेशन की गति को बढ़ाना जरूरी है। नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पंगारिया ने कहा है कि भारत मे वैक्सीन की कम से कम 50-60 लाख डोज़ रोज़ लगाना ज़रूरी है। पर वैक्सीनेशन की इस गति को प्राइवेट अस्पताल धीमा कर रहे हैं और यह चिंता का विषय है। प्राइवेट अस्पताल सरकार से पर्याप्त वैक्सीन तो खरीद रहे हैं पर उसके अनुसार लोगों के लगा नहीं रहे हैं। कई प्राइवेट सेंटर तो वैक्सीन का ऑर्डर भी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में प्राइवेट अस्पताल और सेंटर सीधे-सीधे केंद्र सरकार के राडार पर है।

जहां महाराष्ट्र में प्राइवेट अस्पतालों की टीकाकरण गति 75% है जिसमें लगभग 300 अस्पताल शामिल हैं, वही दिल्ली मे यह गति और धीमी है।

क्यों धीमा है वैक्सीनेशन

वैक्सीनेशन की धीमी गति का एक कारण राज्य सरकारों और प्राइवेट अस्पतालों के बीच तालमेल की कमी भी है। इस मुश्किल समय मे प्राइवेट अस्पतालों और राज्य सरकारों को कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना के खिलाफ यह लड़ाई लड़नी थी। पर ऐसा ना करते हुए दोनों ने अलग ही रुख रखा जिसका परिणाम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

तालमेल बढ़ाने की जरूरत

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि कई राज्यों, केंद्र शासित प्रदेश और प्राइवेट अस्पतालों में लगभग 1.92 करोड़ वैक्सीन बिना इस्तेमाल ऐसे ही रखी हुई हैं। कोरोना से लड़ाई के लिए गठित एजेंसीज का भी यही सुझाव है कि इस तालमेल की कमी को दूर किया जाए और केंद्र सरकार भी इसके लिए कार्य कर रही है। ऐसे मे ज़रूरी है कि राज्य सरकारें और प्राइवेट अस्पताल तालमेल बनाकर साथ काम करें और वैक्सीनेशन की गति को बढ़ाए। तभी कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई मे भारत को जीत मिलेगी।

Corona virus COVID-19
Tanay Mishra
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