...जब बालाकोट में बरसे थे भारतीय वायुसेना के बम, निकल गया था पाकिस्तान का दम

इस हमले के बाद भारत ने शपथ ली थी कि न भूलेंगे न माफ करेंगे।

- आनंद मणि त्रिपाठी

पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को हुए आतंकी हमले को दो साल हो चुके हैं। पाकिस्‍तान की शह पर हुए इस आतंकी हमले में भारत ने 40 जवानों को खोया था लेकिन ठीक 12 दिन बाद ही भारत ने वो कदम उठाया कि पाकिस्‍तान को सांप सूंघ गया और जिसके बाद पाकिस्तान ने अपने घुटने टेक दिए थे। हम बात कर रहे हैं बालाकोट एयर स्ट्राइक की...। भारतीय वायुसेना के उस साहसिक कारनामे का खौफ आज दो साल बाद भी पाकिस्तानियों के जेहन में जिंदा है।

पुलवामा का हमला हो चुका था और इससे पहले हमने उरी हमले का बदला ले लिया था। इस हमले के बाद भारत ने शपथ ली थी कि न भूलेंगे न माफ करेंगे और फिर सर्दी में दिल्ली का तापमान बढ़ने लगा। यूं तो दिल्ली दिखने में सामान्य रही लेकिन भारत में सभी एकजुट होकर बदला लेने के लिए तय कर चुके थे। पीएम मोदी ने भी हर आंसू का बदला लिए जाने का वादा किया और फिर रणनीति पर काम शुरू हो गया।

हमले की जिम्मेवारी आतंकी संगठन जैश ने ली थी तो फिर उसे ही उखाड़ फेंकने की रणनीति पर काम शुरू हुआ। एनएसए अजीत डोभाल के नेतृत्व में तीनों सेनाओं ने रणनीति पर काम शुरू कर दिया। तत्कालीन वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने एयरस्ट्राइक का विकल्प दिया। इसे मंजूर कर लिया गया। दिन गिने जाने लगे। जगह चुनी गई। पीओके का बालाकोट, जहां पर कई सारे आतंकी कैंप होने के इनपुट मिले थे। एलओसी के पास सर्विलांस शुरू कर दिया गया। वायुसेना के विमान लगातार पाकिस्तानी इलाकों में चल रहे कैम्प्स के बारे में जानकारी जुटाने लगे। इसमें खुफिया एजेंसियां भी मदद कर रही थीं।

ऑपरेशन का रिहर्सल शुरू कर दिया गया। वायुसेना ने मिशन तय कर लिया । 26 फरवरी को भारतीय सेना के मिराज विमानों ने बालाकोट इलाके में चल रहे आतंकी शिविरों पर हमला कर दिया। स्ट्राइक में 300 आतंकियों के मारे गए। भारतीय लड़ाकू विमानों ने यह कार्रवाई रातों रात की थी, जिसकी भनक तक पाकिस्‍तान को नहीं लग पाई थी। हमले की रफ्तार इतनी तेज थी कि पाकिस्‍तानी रडार भी भारतीय विमानों की अपने हवाई क्षेत्र में मौजूदगी को पकड़ नहीं पाए थे।

12 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा पार करते हुए पाकिस्तान स्थित बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर को ध्वस्त कर दिया। भारतीय वायुसेना ने मिराज-2000 के साथ ही सुखोई एसयू-30 का इस्तेमाल किया था। भारत ने यह कार्रवाई तड़के करीब 3:30 बजे की थी, जब लोग नींद के आगोश में थे। लेकिन भारतीय विमानों के बमबर्षकों ने वहां जलजला ला दिया था, जिसकी आवाज सुन लोग दहशत में आ गए, उनकी आंखों से नींद गायब हो चुकी थी। बालाकोट में इस ऑपरेशन की गोपनीयता बरकरार रखने के लिए इसका कोडनेम ‘ऑपरेशन बंदर’ दिया था।

उस समय पाकिस्‍तान डिफेंस की ओर से किए गए एक ट्वीट पर भी लोगों ने खूब मजे लिए थे, जिसमें देश की अवाम को आश्‍वस्‍त करते हुए कहा गया था—चैन से सो जाइये, क्‍योंकि पीएएफ जाग रही है। पाकिस्‍तान डिफेंस के ट्विटर हैंडल से यह ट्वीट रात 12 बजकर 6 मिनट पर किया था, जिसके कुछ ही घंटों में भारतीय वायुसेना के बमवर्षक विमानों ने पाकिस्‍तान की नींद उड़ा दी थी। आज हम भारतीय वायुसेना के उसी शौर्य को याद कर रहे है, जिसने पाकिस्‍तान में बैठे आतंकियों को सबक दे दिया कि हम भूलेंगे,न ही माफ करेंगे और ये नया भारत है जो घर में घुसकर मारेगा।

सुनील शर्मा
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