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सबरीमाला मंदिर मामला: SC के फैसले के खिलाफ महिलाओं का विरोध, 4000 गिरफ्तार

सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीकोर्ट के फैसले का विरोध करने वाली 4 हजार महिलाओं को पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में लिया है।
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नई दिल्ली

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Anil Kumar

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Updated: 2 Oct 2018, 9:16 PM IST

सबरीमाला मंदिर मामला: SC के फैसले के खिलाफ महिलाओं का विरोध, 4000 गिरफ्तार

सबरीमाला मंदिर मामला: SC के फैसले के खिलाफ महिलाओं का विरोध, 4000 गिरफ्तार

नई दिल्ली। बीते दिनों देश की सर्वोच्च अदालत ने महिलाओं के हक में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लेकिन अब कुछ महिलाएं ही उस फैसले का विरोध कर रही हैं। इस बाबत विरोध करने वाली 4 हजार महिलाओं को पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में लिया है। दरअसल केरल के पथानमथिट्टा जिले में स्थित सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दी थी। जिसके बाद हाजरों महिलाएं इसका विरोध कर रही हैं। विरोध कर रही महिलाओं की मांग है कि केरल सरकार सर्वोच्च न्यायालय के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करे।

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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

आपको बता दें कि बीते 27 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फैसले में सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को अनुनति दे दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की बीच महिलाओं को अनुमति देने की पुरानी प्रथा को तोड़ दिया था। इससे पहले तक ये वर्ग की महिलाएं मंदिर में प्रवश नहीं कर सकती थीं। बता दें कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मामले में अदालत की पांच सदस्यीय पीठ में से चार ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था, वहीं पीठ में शामिल एकमात्र महिला न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा ने अपनी अलग राय रखी थी।

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विरोध कर रही महिलाओं की मांग

बता दें कि कोर्ट के फैसले का विरोध कर रही महिलाओं ने विरोध करते हुए राज्य और केंद्र सरकार से मांग की है कि अदालत के फैसले की समीक्षा की जाए। महिलाओं का कहना हैं कि कोर्ट का यह फैसला 800 वर्ष पुरानी परंपरा पर विश्वास रखने वालों के खिलाफ था। इधर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराय विजयन ने सोमवार को एक बैठक आयोजित की थी जिसमें मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के साथ सुविधाओं को बढ़ाने के लिए आवश्यकता पर चर्चा की गई। जबकि सीपीआई-एम, भाजपा राज्य इकाई के साथ-साथ पांडलम रॉयल फैमिली समेत कई राजनीतिक दलों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ निराशा व्यक्त की है। भाजपा का कहना है कि सरकार मंदिर की परंपरा में विश्वास रखने वाले समर्थकों की भावनाओं पर विचार नहीं कर रही थी।

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