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हादसों में घायलों की मदद करने वालों के संरक्षण का कानून उलझा

गुड सेमरटेन एक्ट: यहां नौकरशाही में फंसा कानून, कर्नाटक ने बाजी मारी
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भोपाल

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Ram kailash napit

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Updated: 2 Oct 2018, 4:04 AM IST

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भोपाल. सड़क दुर्घटनाओं में मदद करने वालों को पुलिस की गवाही और कोर्ट के झंझट से मुक्ति दिलाने वाले कानून का मसौदा तीन साल से प्रदेश की नौकरशाही में उलझा हुआ है, जबकि कर्नाटक ने कानून बनाकर बाजी मार ली हैै। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केन्द्रीय भू—तल परिवहन मंत्रालय ने 2015 में राज्यों को गुड सेमरटेन के निर्देश जारी किए थे। इसके अनुसार घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वालों से न तो बिल के पैसे मांगे जाएंगे न ही पुलिस उन पर गवाह बनने के लिए दबाव डाल सकेगी। केन्द्र का कहना था कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को गोल्डन आवर यानी एक घंटे में मदद से उसकी जान बचाई जा सकेगी।

खराब सड़कों से मौत के मामले में टॉप-3 में मप्र
सड़कों पर गड्ढों के कारण मौत के मामले में प्रदेश टॉप-3 राज्यों में है। यहां वर्ष 2013 से 2017 के दौरान 1385 लोगों की जान सिर्फ सड़क के गड्ढों के कारण गई। सबसे ज्यादा 4415 मौतें उत्तर प्रदेश में हुई हैं। 2136 मौतों के साथ महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर है। इसका खुलासा 4 सितंबर 2018 को दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के सामने राज्यों के आंकड़े प्रस्तुत करने के बाद हुआ है।

कवायद के बाद ठंडे बस्ते में चला गया प्रस्ताव
गृह विभाग के तत्कालीन सचिव डीपी गुप्ता ने गुड सेमरटेन एक्ट का प्रस्ताव तैयार किया था। विभागमें अपर प्रमुख सचिव पद पर बीपी सिंह पदस्थ थे जो कि आज मुख्य सचिव हैं। इन्होंने भी प्रस्ताव पर सहमति दी थी। प्रस्ताव आगे बढ़ पाता उससे पहले ही बीपी सिंह मुख्य सचिव बन गए। उनकी जगह केके सिंह गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव बने। जब उनके सामने गुड सेमरटेन एक्ट का प्रस्ताव आया तो उन्होंने उसे ठंडे बस्ते में डलवा दिया।

हादसों पर एक नजर
मप्र 2017 में सड़कों से 9664 मौत
नेशनल हाइवे पर हुए 2063 सड़क एक्सीडेंट में 2564 लोग मरे।
स्टेट हाइवे पर हुए 2666 सड़क एक्सीडेंट में 3040 लोग मरे।
खराब सड़क से हुए 443 एक्सीडेंट में 420 लोग मरे।

गृह विभाग में सचिव रहते हुए गुड सेमरटेन एक्ट का मसौदा तैयार किया था। अब आप गृह विभाग में पूछें तो बेहतर होगा।
डीपी गुप्ता, आईजी रेलवे भोपाल
गुड सेमरटेन बिल का मसौदा कब बना था मेरी जानकारी में नहीं है।मैं इसे दिखवाता हूं।
मलय श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव गृह