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सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान लेकिन दुखी भी हूं

सबरीमाला मंदिर के पुजारियों और इस परंपरा से जुड़े लोग सुप्रीीम कोर्ट के फैसले से नाखुश हैं।
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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 28 Sep 2018, 8:37 PM IST

sabarimala temple

सबरीमाला मंदिर के मुख्य पुजारी बोले- सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान लेकिन दुखी भी हूं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का हर वर्ग से दिल खोलकर स्वागत किया। महिला बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि हिंदू धर्म में तो औरत का शक्ति का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में किसकी हिम्मत होगी कि शक्ति को ही मंदिर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दे, लेकिन मंदिर के पुजारियों और इस परंपरा से जुड़े लोग कोर्ट के इस फैसले से नाखुश हैं। उन्होंने कहा है कि वे 12 साल के कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले के खिलाफ एक याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं।

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सबरीमाला के पुजारी बोले- फैसले से निराश

कोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए मंदिर के मुख्य पुजारी, के. राजीवारू ने कहा कि मैं अदालत के फैसले का सम्मान करूंगा, लेकिन मैं चाहता हूं कि परंपरा और संस्कृति को जारी रखने की अनुमति दी जाए। पांडलम रॉयल फैमिली के प्रवक्ता, जिनकी सबरीमाला मंदिर के मामलों में एक अभिन्न भूमिका है, शशिकुमार वर्मा ने कहा कि राजपरिवार फैसले से निराश है। इस फैसले के बाद सदियों पुरानी परंपरा बदल गई है और यह निराशाजनक है। वहीं त्रावणकोण देवासन बोर्ड (टीडीबी) ने भी कहा कि वह आज के फैसले पर चर्चा करने के बाद अपील के बारे में सोच सकते हैं। टीडीबी के अध्यक्ष ए. पद्मकुमार ने कहा कि वे अब यह देखने के लिए कर्तव्यबद्ध हैं कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश कैसे अमल में आएगा। उन्होंने कहा कि अब हम राज्य सरकार से बात करेंगे कि क्या करने की जरूरत है। लंबी कानूनी लड़ाई अब खत्म हो गई है।

मंदिर को कोई जिमखाना नहीं : मेनका गांधी

सबरीमाला मंदिर पर कोर्ट के फैसले पर खुशी जताते हुए केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि भगवान तो सबके लिए होते हैं। हिंदू धर्म में तो औरत का शक्ति का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में किसकी हिम्मत होगी कि शक्ति को ही मंदिर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दे। कुछ लोगों ने मंदिरों को क्लब बना दिया है। यह फैसला उन क्लबों को वापस मंदिरों में बदलने वाला है। उन्होंने कहा कि यह हास्यास्पद है कि ईश्वर किसी एक के लिए हैं और दूसरे के लिए नहीं। उन्हें सबके लिए होना चाहिए। यह मंदिर है कोई जिमखाना क्लब नहीं, जो निर्देश देता है कि कौन प्रवेश कर सकता है और कौन नहीं। गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि ये हिंदूज्म को विस्तार देता है, उसे आधुनिक बनाता है।