
सबरीमला मंदिर मामला: सुप्रीम कोर्ट का पीठ के फैसले पर जल्द सुनवाई से इनकार
तिरुवनंतपुरम। सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्म समिति द्वारा बृहस्पतिवार को बुलाए गए प्रदेशव्यापी बंद का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। राज्य में सिर्फ इक्का-दुक्का वाहन चलते दिखाई दे रहे हैं। कई इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दो दिन तक धारा-144 लगा दी गई है। जबकि अखिल केरल ब्राह्मण संघ ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
केरल बंद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का समर्थन है। बुधवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के हमले को लेकर इस बंद का आह्वान किया गया है। इस संबंध में पथानंथित्ता के जिलाधिकारी पीबी नूह ने बताया कि स्थिति शांतिपूर्ण है। यहां कोई परेशानी नहीं है। हमनें पंपा और सन्निधनम ने पर्याप्त पुलिस बल लगाया है। कोई समस्या नहीं है। फिलहाल धारा-144 को दो दिनों के लिए लागू किया गया है, आगे का फैसला हालात के मुताबिक लिया जाएगा। धारा-144 पंपा, निलाक्कल, सन्निधनम और एलावुंगल में लगाई गई है।
वहीं, अखिल केरल ब्राह्मण संघ ने सुप्रीम कोर्ट के हर आयु वर्ग की महिलाओं के सबरीमला मंदिर में प्रवेश की अनुमति के आदेश के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि कोर्ट का आदेश कई गंभीर गलतियों से प्रभावित है, जिसके चलते अयप्पा के असल श्रद्धालुओं पर फर्क पड़ा है।
उधर, केरल के पुलिस महानिदेशक ने साइबर सेल को आदेश दिया है कि वो उन लोगों के खिलाफ मुकदमें दर्ज करें जो निलाक्कल और पंबा की हिंसक घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर नफरत भरी पोस्ट फैला रहे हैं।
केरल बंद को लेकर विरोध करने वाले प्रदर्शनकारी 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश को मंजूरी मिलने देने का विरोध कर रहे थे। कोझीकोड, मलप्पुरम व अन्य कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने केरल राज्य सड़क परिवहन निगम के बसों पर पथराव किया, जिसके बाद उनका संचालन रोक दिया गया।
महानवमी के मौके पर सभी राज्य व केंद्र सरकार के कार्यालय, बैंक व शैक्षणिक संस्थान बंद हैं। दुकानें व बाजार भी बंद है। तिरुवनंतपुरम व कोच्चि के आईटी पार्क में भी लोगों की कम मौजूदगी रही। बंद का असर रेल यात्रियों पर पड़ा उन्हें स्टेशनों से टैक्सी व सार्वजनिक वाहनों पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
भगवान अयप्पा का मंदिर बुधवार को शाम पांच बजे मासिक पूजा-अर्चना के लिए खोला गया। सर्वोच्च न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले के बाद बुधवार को पहली बार मंदिर खोला गया। सर्वोच्च न्यायालय ने 28 सितंबर के अपने फैसले में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दी थी।
Published on:
18 Oct 2018 01:59 pm
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