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संपर्क फॉर समर्थन: अमित शाह की रणनीति से विपक्ष हैरान

मध्यप्रदेश,राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव सिर पर हैं, शाह इन राज्यों में जाने की बजाय हस्तियों से मिलने में लगे।

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संपर्क फॉर समर्थन: अमित शाह की रणनीति से विपक्ष हैरान

नई दिल्ली। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के अभियान संपर्क फॉर समर्थन को लेकर कई राजनीतिक कयास निकाले जा रहे हैं। इस अनोखी मुहिम से विपक्ष के साथ पार्टी के अंदर भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर शाह की मंशा क्या है। एक तरफ जहां मध्यप्रदेश,राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव सिर पर हैं, वहीं शाह इन राज्यों में न जाकर इस अभियान को चला रहे हैं। इस अभियान के तहत वह देशभर में चर्चित हस्तियों और एनडीए की समर्थक पार्टी के मुखियाओं से मुलाकात कर रहे हैं। अभी तक वह रतन टाटा,माधुरी दीक्षित और शिवसेना पार्टी के प्रमुख उद्धव ठाकरे से मिल चुके हैं।शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अभिनेता सलमान खान और उनके पिता सलीम खान से मिले।

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50 हस्तियों से मिलेंगे

गौरतलब है की मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर समर्थन के लिए भाजपा ने संपर्क फॉर समर्थन अभियान की शुरुआत की है। 29 मई को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस अभियान को शुरू किया था। इस दौरान सांसद,विधायक समेत भाजपा के नेता मशहूर हस्तियों को मोदी सरकार की चार साल की उपलब्धियों के बारे में बताएंगे। इस अभियान के जरिए भाजपा अध्यक्ष देश की 50 जानी-मानी हस्तियों से मिलेंगे।

लोकसभा चुनाव बना लक्ष्य

राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अमित शाह राज्यों में प्रचार के बजाए लोकसभा चुनाव को अपना लक्ष्य बना चुके हैं। इसके लिए पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। इस अभियान का प्रचार पूरे देश हो रहा है। अहम हस्तियों से मिलने के कारण उन्हें जनसमर्थन मिलने की उम्मीद है। जहां पार्टियां चुनाव प्रचार के दौरान इन हस्तियों का इस्तेमााल किया करतीं थी। वहीं शाह इन्हें सरकार की उपलब्यियां बताकर समर्थन हासिल करने में जुटे हैं।

मोदी के नाम पर होगा चुनाव

तीन राज्यों के चुनाव में मोदी का नाम और चार साल की उपलब्धियों को लेकर मैदान में उतरेगी। शाह की रणनीति है कि मोदी के नाम पर ही इन राज्यों में चुनाव लड़ा जाए। इससे स्थानीय मुद्दे गौड़ हो जाएंगे। जहां राहुल गांधी मध्यप्रदेश के मंदसौर में अपना प्रचार अभियान चला रहे हैं, वहीं शाह इन हस्तियों से मिल मोदी को और मजबूत करने की रणनीति पर चल रहे हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि इस तरह वह एक तीर से लोकसभा चुनाव के साथ राज्य में होने वाले चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

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