रफाल उड़ाने का ट्रेनिंग मिलने के बाद उनकी पहली तैनाती राजस्थान एयरबेस पर हुई है। शिवांगी सिंह विंग कमांडर अभिनंदन के साथ मिग फाइटर प्लेन उड़ा चुकी हैं। 2017 में फाइटर विमान की पायलट बनने के 3 साल बाद रफाल उड़ाने वाली देश की पहली महिला बनीं।
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की रहने वाली शिवांगी सिंह ( Shivangi Singh ) का बनारस से रफाल फाइटर जेट उड़ाने तक का सफर रोमांच से भरा है। भारतीय वायुसेना में उनका चयन 2015 में हुआ था। अब वह देश की अत्याधुनिक फाइटर जेट रफाल को नील गगन में पलक झपकते ही कई गोते लगाने वाली और दुश्मनों पर कहर बरपाने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं।
रफाल पायलट बनने का प्रशिक्षण हासिल करने के बाद उनकी पहली तैनाती राजस्थान एयरबेस पर हुई है। अभी तक वह मिग-21 लड़ाकू विमान उड़ाती रही हैं। अब वह रफाल फाइटर जेट उड़ाएंगी।
कर्नल वीएन सिंह से मिली पायलट बनने की प्रेरणा
दरअसल, शिवांगी को फाइटर पायलट बनने की प्रेरणा नाना कर्नल वीएन सिंह से मिली। उनके नाना कर्नल वीएन सिंह सेवानिवृति के बाद नई दिल्ली में रहते हैं। शिवांगी सिंह के सपने का जिक्र करते हुए उनकी की मां सीमा सिंह बताती हैं कि उनके पिता एक बार नई दिल्ली में बच्चों को म्यूजियम दिखाने ले गए। वहां एयरपोर्स के विमान और पायलट की ड्रेस देखकर शिवांगी काफी खुश हुई। वहीं शिवांगी ने नाना से कहा था कि उन्हें एयरफोर्स में जाना है।
अभिनंदन के साथ उड़ा चुकी हैं मिग-21
एक दिलचस्प बात यह है कि शिवांगी सिंह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पढ़ी हैं। वर्तमान में फ्लाइट लेफ्टिनेंट शिवांगी सिंह महिला पायलटों के दूसरे बैच की हिस्सा हैं। आईएएफ में उनकी कमिशनिंग 2017 में हुई। शिवांगी सिंह कमांडर अभिनंदन के साथ भी मिग फाइटर प्लेन उड़ा चुकी हैं।
पढ़ने में मेधावी रही हैं शिवांगी
बनारस के फुलवरिया गांव रेलवे क्रॉसिंग की रहने वाली शिवांगी सिंह पढ़ाई और खेल में बेहतर प्रदर्शन करने वाली लड़कियों में शामिल रही हैं। सनबीम वुमेंस कॉलेज बीएचयू से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। बीएससी की पढ़ाई के दौरान ही वह एनसीसी से जुड़ गई थीं।
3 साल में लगाई बड़ी छलांग
शिवांगी ने केवल तीन साल में बड़ी छलांग लगाकर नील गगन में उड़ने का सपना पूरा कर लिया है। 2015 में उन्होंने वायु सेना की परीक्षा पास करने के बाद डेढ़ साल तक ट्रेनिंग चला। इसके बाद दूसरे बैच में 2017 में उन्हें देश की 5 महिला फाइटर विमान की पायलटों में चुना गया। अब तीन साल के अंदर वह अपनी काबिलियत के दम पर रफाल विमान उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बन गई हैं।