अलंका लंबा ने कांग्रेस के साथ अपने सियासी करियर का आगाज किया था। उनका एक बेटा भी है।
नई दिल्ली। गैर राजनीति परिवार में पली बढ़ी अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने राजनैतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। बीस साल से अधिक वर्ष अलका लांबा कांग्रेस के साथ सियासत करती रहीं। छात्र नेता के रूप में उन्होंने अपने पॉलिटिक्ल करियर का आगाज किया था। कांग्रेस के स्टूडेंट विंग एनएसयूआई की राजनीति और 1995 में दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट का चुनाव जीता। 1997 में अलका NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। सोनिया गांधी ने उन्हें 2003 में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना के खिलाफ विधानसभा चुनाव में उतारा लेकिन वह चुनाव हार गईं। 2006 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं।
अलका लांबा 2007 से 2011 तक कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव रहीं। 2013 में अलका लांबा ने कांग्रेस छोड़ दी। उन्हे दिल्ली विधानसभा के चुनावों में कांग्रेस का टिकट नहीं मिला था। इसके बाद वह उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा और विधानसभा में चांदनी चौक से चुनाव लड़ा। 2015 के चुनावों में उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार समन कुमार गुप्ता को 18,287 वोटों से हराया।
21 सितंबर 1975 को दिल्ली में जन्मी अलका लंबा ने M.ED और रसायन विज्ञान में मास्टर डिग्री हासिल की। लंबा ने यूके, रूस, चीन और अमरीका जैसे देशों में महिला सशक्तिकरण के कार्यक्रमों में भाषण दिया। 2006 में उन्होंने गो इंडिया फाउंडेशन नामक एनजीओ भी बनाया। एनजीओ का मकसद महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें भारत के राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक विकास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। ये एनजीओ 2010 में 15 अगस्त पर एक साथ 65 हजार लोगों से रक्त दान करने के लिए चर्चा में आया था। अलका लांबा ने लोकेश कपूर से शादी की मगर कुछ ही वर्षों में दोनों अलग हो गए। 2003 में उन्होंने तलाक ले लिया। उनके पति लोकेश कपूर ने आरोप लगाया कि अलका ने उनके सुभाष नगर के मकान को अवैध तरीके से कब्जा कर अपना राजनीतिक दफ्तर वहां पर शुरू कर दिया है। अलका 2012 में भी चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने गुवाहाटी छेड़छाड़ मामले में पीड़ित युवती का नाम सार्वजनिक कर दिया था। इसके बाद उन्हें सजा भी दी गई। भाजपा विधायक ओपी शर्मा की दुकान में तोड़-फोड़ को लेकर भी वह सुर्खियों में रहीं।