
अभिषेक सिंघल
नई दिल्ली। देश में जहां एक और तेजी से ग्रीन उर्जा की उत्पादन क्षमता बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर ग्रिड अपग्रेड नहीं होने से ग्रीन उर्जा के उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। इस कारण नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय ने राज्यों को ग्रिड ट्रांसमिशन क्षमता का विवरण सार्वजनिक करने के लिए कहा है ताकि उसके अनुरूप उर्जा परियोजनाएं विकसित की जा सकें। राजस्थान में ही करीब चार गीगावाट से ज्यादा सौर और पवन उर्जा उत्पादन क्षमता प्रसारण तंत्र के कारण से प्रभावित हुई है। जिस कारण दिन के समय कई बार सौर और पवन उर्जा उत्पादकों को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी।
उत्तरी क्षेत्रीय लोड डिस्पेच सेंटर (एनआरएलडीसी) के अनुसार राजस्थान में 23 गीगावाट की नवीकरण उर्जा की स्थापित क्षमता है वहीं ट्रांसमिशन क्षमता करीब 18.9 गीगावाट के करीब है। यह पूरी ट्रांसमिशन क्षमता लोंगटर्म जनरल नेटवर्क एक्सेस (जीएनए) से जुड़े प्रोजेक्ट्स को आवंटित है। जिसके चलते 4 गीगावाट क्षमता टी-जीएनए (टेम्परेरी जनरल नेटवर्क) के भरोसे रह जाती है। ग्रिड इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत करने के कार्यक्रम में 18 महीने से अधिक की देरी के कारण राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा जोन से 8.1 गीगावाट बिजली बाहर भेजने की योजना में बाधाएं आईं। वहीं एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार मार्च से सितंबर 2025 तक, राजस्थान में लगभग 4 गीगावाट पवन-सौर ऊर्जा में कटौती की गई।
गौरतलब है कि हाल ही राजस्थान ने अगले तीन साल में उपलब्ध हो सकने वाली प्रसारण क्षमता विवरण भी दिया है। जिसके अनुसार वित्तीय वर्ष 2026 में भविष्य के नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए अनुमानित 13 गीगावाट तक की अतिरिक्त ट्रांसमिशन क्षमता होगी। केन्द्रीय नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय ने अपने निर्देश में राजस्थान के क्षमता विवरण देने का उदाहरण भी दिया है। वहीं आरईआरसी ने हाल ही ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस प्रक्रिया की भी अनुमति दे दी है।
उर्जा राज्य मंत्री श्रीपद नायक ने सांसद राहुल कस्वां के एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि 31 अक्टूबर तक राजस्थान की कुल स्थापित उर्जा क्षमता 54.77 गीगावाट थी। वहीं राजस्थान में 33 इंटर स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएसटीएस) प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं जो नवीकरणीय उर्जा को राज्य से बाहर मुख्य ग्रिड में पहुंचाएंगे। सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी इंडिया लिमिटेड को राजस्थान के विभिन्न रिन्यूएबल एनर्जी जोन से आईएसटीएस की कनेक्टिविटी के लिए 133 गीगावाट के आवेदन मिले हैं। जिनमें से 73 गीगावाट के लिए प्रसारण तंत्र विकसित होने की प्रक्रिया में है और शेष 60 गीगावाट के लिए प्रसारण योजना अभी बनेगी।
राजस्थान में नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में कटौती हो रही है, जिसका मुख्य कारण ट्रांसमिशन नेटवर्क की अनुपलब्धता है। नए ग्रिड और उससे जुड़ी ट्रांसमिशन लाइन के डवलपमेंट के जरिए बिजली की आपूर्ति में लगभग 3-4 वर्ष लगते हैं, जबकि सौर ऊर्जा का उत्पादन चरणों में होने से पर्याप्त उत्पादन क्षमता 15-20 महीनों में स्थापित की जा सकती है। इसलिए, उत्पादन और प्रसारण की सुनियोजित योजना बहुत पहले से बनाए जाने की आवश्यकता है।
- इंजीनियर डीडी अग्रवाल, पॉवर क्षेत्र एक्सपर्ट
Published on:
15 Jan 2026 12:54 pm
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