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इस किले में आज भी सुनाई देती हैं मासूम लड़कियों की चीखें, वजह है बहुत दर्दनाक

आजतक दुनिया में कई शापित जगहों के बारे में आपने सुना होगा। फिल्मों में, कहानियों में अपने कई बार दिल को दहला देने भुतिया स्थानों को देखा होगा। लेकिन आज हम आपको जिस शापित किले के बारे में बताने जा रहे हैं उसकी कहानी बहुत ही दर्दनाक और डरावनी है..

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Rahul Mishra

Dec 22, 2016

story of haunted fort talbehat lalitpur

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आजतक दुनिया में कई शापित जगहों के बारे में आपने सुना होगा। फिल्मों में, कहानियों में अपने कई बार दिल को दहला देने भुतिया स्थानों को देखा होगा। लेकिन आज हम आपको जिस शापित किले के बारे में बताने जा रहे हैं उसकी कहानी बहुत ही दर्दनाक और डरावनी है।

गांव के लोगों का कहना है कि इस किले में रात तो छोड़ो कोई दिन में भी जाने से घबराता है। लोगों का कहना है कि करीब 150 साल पहले यहां एक ऐसी अनहोनी हुई थी जिसके बाद से ये किला डर का एक प्रतीक बन गया है। इस अनहोनी के के सुबूत के तौर पर आज भी इस किले के दरवाजे पर 7 लड़कियों की पेंटिंग बनी हुई है। लोगों के मुताबिक हर साल गांव की महिलाएं पेंटिंग में बनी इन लड़कियों की पूजा भी करती हैं।

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इस शापित किले से आज भी आती है बेबस लड़कियों की चीखने की आवाजें-

सन् 1850 में मर्दन सिंह ललितपुर के बानपुर के राजा थे। वे अक्सर तालबेहट भी आते-जाते रहते थे, इसलिए उन्होंने तालबेहट में एक किले का निर्माण कराया था। इस महल को राजा के पिता प्रहलाद सिंह ने अपना निवास स्थान बना लिया।

राजा मर्दन सिंह को एक वीर योद्धा और क्रांतिकारी के रूप में आज भी याद किया जाता है। 1857 की क्रांति के दौरान इन्होने रानी लक्ष्मीबाई के साथ अंग्रेजों से लोहा लिया था। एक ओर तरफ जहां मर्दन सिंह का नाम लोग सम्मान से लेते हैं, वहीं उनके पिता प्रहलाद सिंह को बुंदेलखंड का कलंक मानते हैं।

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कहानी के मुताबिक अक्षय तृतीया के इस इलाके में महिलाऐं नेग मांगने के लिए राजा के दरवाजे पर जाया करतीं थीं। इस त्योहार पर नेग मांगने की रस्म होती थी। इसी रस्म को पूरा करने के लिए तालबेहट राज्य की 7 लड़कियां राजा मर्दन सिंह के इस किले में नेग मांगने पहुंची। मर्दन सिंह के पिता प्रहलाद किले में अकेले थे। लड़कियों की खूबसूरती देखकर उनकी नीयत खराब हो गई और उन्होंने इन सातों को बंदी बनाकर उनके साथ बलात्कार किया। इन सातों लड़कियों ने महल की छत से कूदकर अपनी जान दे दी।

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7 लड़कियों के साथ हुई इस घटना से गांव में हाहाकार मच गया, अपने पिता की करतूत का पश्चाताप करने के लिए राजा मर्दन सिंह ने लड़कियों को श्रद्धांजलि देने के लिए किले के मुख्य द्वार पर उन सात लड़कियों के चित्र बनवाए। ये चित्र आज भी यहां मौजूद हैं लेकिन इसके बावजूद ललितपुर में अक्षय तृतीया के दिन को अशुभ माना जाता है।

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इस दिन महिलाएं किले के मुख्य द्वार पर बनी सातों लड़कियों के चित्र की पूजा-अर्चना करती हैं। लोगों की मान्यता के अनुसार ऐसा करने से उन आत्माओं को शांति मिलती है। यहां के स्थानीय निवासियों के मुताबिक आज भी उन 7 पीडि़त लड़कियों की आत्माओं की चीखें तालबेहट फोर्ट में सुनाई देती हैं। यह घटना अक्षय तृतीया के दिन हुई थी, इसलिए आज भी यहां यह त्योहार नहीं मनाया जाता। इस शापित किले को यहां के स्थानीय निवासी बहुत ही अशुभ मानते हैं । कई बार लड़कियों की चीखने की आवाज महसूस की जा चुकी है। इसलिए रात ही नहीं, बल्कि दिन में भी यहां लोग जाना ठीक नहीं समझते।