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पीके: ऐसा रणनीतिकार जिसने पॉलिटिकल ब्रांडिग को नया आयाम दिया, मोदी-नीतीश को दिलाई जादुई जीत

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर जदयू के साथ जुड़ गए हैं।
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नई दिल्ली

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Saif Ur Rehman

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Updated: 16 Sep 2018, 1:30 PM IST

PK

प्रशांत किशोर एक ऐसा रणनीतिकार जिसने चुनावी ब्रैंडिंग को नया आयाम दिया, मोदी-नीतीश को दिलाई जादूई जीत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस देश की दो ऐसी बड़ी पार्टी हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपनी पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव दिया। लेकिन राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर ने यहां भी अपनी सियासी समझ को देखते हुए नीतीश कुमार का हाथ थामा। सवाल ये है कि आखिर जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर की पार्टी से प्रस्ताव था तो क्षेत्रीय स्तर के राजनैतिक दल से क्यों जुड़े। तस्वीर साफ है, कहा जा रहा है कि उन्हें पार्टी में नंबर दो का रुतबा मिला है। खुद बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार जेडीयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में 'पीके' पार्टी की सदस्यता दिलवाई। आइए प्रशांत किशोर के जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें को जानते हैं।

1.) प्रशांत किशोर का जन्म 1977 में बिहार के बक्सर में हुआ। उनके पिता बिहार में सरकारी चिकित्सक थे। उनकी पत्नी जाह्नवी दास भी डॉक्टर हैं। जो असम में कार्यरत बताई जाती हैं। उनका एक बेटा भी है।

2.) पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर को भारत में क्रांतिकारी चुनावी कैंपेन चलाने का श्रेय दिया जाता है। वह एक चुनावी रणनीतिकार हैं। भारतीय राजनीति में आने से पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए आठ साल तक काम किया। यूनिसेफ (UNICEF) में उन्हें ब्रांडिंग का जिम्मेदारी मिली। इसके बाद वह 2011 में गुजरात लौट आए।

3.) कहा जाता है कि 'वाइब्रैंट गुजरात' के आयोजन के दौरान ही उनकी राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जान-पहचान हुई और फिर प्रशांत किशोर ने मोदी के लिए काम करना शुरू किया। उनकी प्रसिद्धी का शुभारंभ 2012 में शुरू हुआ, जब उन्होंने गुजरात चुनाव में मोदी के लिए रणनीति और प्रचार किया। प्रो बोनो ( बिना कोई चार्ज लिए काम करना) की तरह भाजपा और गुजरात सरकार के लिए काम करते हुए वह एक भरोसेमंद और प्रभावशाली रणनीतिकार बन गए।

4.) 2013 में उन्होंने जवाबदेह शासन के लिए नागरिक वाला आइडिया Citizens for Accountable Governance (CAG) संकल्पित किया। इसके बाद इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) की शुरूआत हुई। यह भारत की पहली पॉलिटिकल एक्शन कमेटी बताई जाती है। IPAC ने चुनाव लड़ने और प्रचार करने के तरीकों में प्रोफेशनलिज्म और इनोवेशन के माध्यम से बदलाव लाने का कार्य किया। इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) शिक्षित युवाओं और युवा पेशेवरों का एक ऐसा प्रभावी मंच है, जहां भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में हिस्सा लेने के इच्छुक युवाओं को बिना किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बने आने वाली सरकारों के एजेंडा को स्थापित करने के लिए सार्थक रूप से मौका दिया जाता है।

5.) 2014 में उनकी ख्याति आसमां छूने लगी। चुनाव को उन्होंने मोदी लहर में बदल दी। चाय पे चर्चा, थ्री डी रैली, रन फोर यूनिटी, मंथन और सोशल मीडिया प्रोग्राम्स का आइडिया उनके दिमाग की उपज बताया जाता है।

6.) दिसंबर, 2014 में राजनीति के चाणक्य प्रशांत किशोर ने मोदी का साथ छोड़ दिया, इसके बाद उन्होंने नीतीश कुमार की हाथ थामा। उनके मोदी खेमा छोड़ने की वजह अमित शाह से मिली उपेक्षा बताई जाती है। कहा ये भी जाताहै कि प्रशांत किशोर के सीएजी को विशेषज्ञ नीति संगठन, आई-पीएसी में बदलने के प्रस्ताव को मोदी की तरफ से ठुकराए जाने के बाद वह अलग हो गए।

7.) 2015 में शानदार रणनीति बनाते हुए राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर ने बिहार में नीतीश की सरकार बना कर दम दिया। उन्होंने नीतीश कुमार को न सिर्फ पार्टी के चेहरे के तौर पर प्रचारित किया बल्कि सरकार, सुशासन, विकास और बिहार की ब्रैंडिंग भी की। उन्ही की सलाह थी कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव एक साथ भाषण ना दें। यहीं वजह थी कि नीतीश जहां अपने भाषणों में विकास की बात करते दिखे वहीं लालू सामाजिक न्याय और जातिगत ध्रुवीकरण पर जोर देते रहे। इसके पीछे विचार यही था कि दोनों नेता एक दूसरे के पूरक नजर आएं।

8.) प्रशांत किशोर बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार में प्रमुख सलाहाकर पद पर तैनात थे, जो केबिनेट मंत्री के समकक्ष पद है। 2015 में महागठबंधन की सरकार के बाद किशोर मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहाकार के अलावा बिहार विकास के एजेंडे को लेकर बनाए गए बिहार विकास मिशन (बीवीएम) का काम देख रहे थे। नीतीश के एनडीए में शामिल हो जाने के बाद वह नीतीश कुमार से अलग हो गए।

9.) इस बीच अलग-अलग चुनावों में प्रशांत के अलग-अलग दलों के साथ काम करने की चर्चाएं भी चलती रहीं। 2017 में पंजाब और यूपी में कांग्रेस के लिए काम किया।

10.) हाल ही में उनसे जुड़ी संस्‍था इंडियन पॉलिटिकल एक्‍शन कमेटी (आई-पीएसी) ने पिछले दिनों एक ऑनलाइन सर्वे कर दावा किया कि सर्वाधिक 49 प्रतिशत लोगों ने देश के नेता के रूप में पीएम नरेंद्र मोदी को पंसदीदा नेता बताया।