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ऐसे मंदिर जहां पुरूषों का जाना वर्जित, महिलाएं करती हैं पूजा

इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है, इस दौरान पुरुषों के प्रवेश पर रोक है।

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ऐसे मंदिर जहां पुरूषों का जाना वर्जित, महिलाएं करती हैं पूजा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सबरीमाला मंदिर मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत के फैसले के बाद अब मंदिर में हर उम्र की महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि पूजा करने का अधिकार भगवान के सभी भक्तों को है, महिलाओं के साथ इस तरह का भेद-भाव करना गलत है। बता दें कि मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं का प्रवेश वर्जिेत था, जिसके खिलाफ कोर्ट में केस चल रहा था। लेकिन क्या आपको पता है देश में ऐसे कई मंदिर है जहां पुरुषों के जाने पर पाबंदी है। आइए आपको बताते हैं इन मंदिरों के बारे में-

अत्तुकल मंदिर

केरल स्थित इस मंदिर में महिलाओं की पूजा होती है। इस मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर ने पोंगल त्योहार मनाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। इस त्योहार में तीन लाख महिलाओं ने हिस्सा लिया था।

कामरुप कामाख्या मंदिर

असम में मौजूद इस मंदिर में माता की माहवारी का उत्सव मनाया जाता है। उत्सव के दौरान पुरुषों के प्रवेश पर रोक है। इस दौरान केवल महिला संत और संन्यासिन मंदिर की पूजा करती हैं। बता दें कि इस मंदिर में माता सती के माहवारी कपड़े को बहुत शुभ समझा जाता है और इसे भक्तों के बीच बांटा जाता है।

चक्कूलाथूकावु मंदिर

वहीं, केरल के इस मंदिर में भगवती की पूजा होती है। इस पूजा में 'नारी पूजा' नामक वार्षिक अनुष्ठान होता है। इसमें महिलाएं 10 दिनों का व्रत रखती हैं और पुजारी इन महिलाओं के चरण धोते हैं। नारी पूजा के दौरान केवल महिलाओं ही मंदिर के अंदर जा सकती है।

संतोषी मां

बता दें कि संतोषी मां का व्रत केवल महिलाएं या अविवाहित लड़कियां ही रखती हैं। इस व्रत के दौरान वह खट्टे फल या आचार नहीं खा सकतीं। पुरुषों को मंदिर में आने की इजाजत तो होती है, लेकिन शुक्रवार के दिन मंदिर के अंदर वे नहीं आ सकते है।

ब्रह्मा मंदिर

राजस्थान के पुष्कर में बने इस मंदिर में शादीशुदा पुरुषों का आना सख्त मना है। यह पूरे विश्व में बना हुआ ब्रह्मा का अकेला मंदिर है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर

महाराष्ट्र के नासिक में बने इस मंदिर का गर्भगृह भगवान शिव को समर्पित है। गर्भगृह में पहले महिलाओं के जाने पर रोक थी, जिसके बाद 2016 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि अगर महिलाओं का मंदिर जाना वर्जित है तो पुरुष भी इसमें नहीं जा सकते। कोर्ट के इस फैसले के बाद से गर्भगृह में पुरुषों का जाना मना हो गया है।

भगवती मंदिर

जम्मू-कश्मीर के कन्याकुमारी में बने हुए इस मंदिर में मां दुर्गा के कन्या स्वरुप की पूजा होती है। पुराण के अनुसार यहां देवी सती के रीढ़ की हड्डी गिरी थी। बता दें कि उन्हें संन्यास की देवी भी माना जाता है। इसी वजह से केवल संन्यासी पुरुष मंदिर के दरवाजे तक आ सकते हैं। वहीं, शादीशुदा पुरुषों के आने पर रोक है।

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