
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गर्भ गिराने के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के जेजे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर 13 साल के नाबालिग को 31 हफ्ते के गर्भ गिराने की अनुमति दी है।इससे पहले शीर्ष अदालत ने नाबालिग लड़की के स्वास्थ्य की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया था। मेडिकल बोर्ड की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सर्वोच्च अदालत ने यह फैसला दिया। बता दें कि जस्टिस एसए बोबड़े और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने निर्देश दिया था कि नाबालिग लड़की के स्वास्थ्य की जांच के लिए मुंबई स्थित सर जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल में मेडिकल बोर्ड गठित किया जाए जो उसके गर्भ को खत्म करने की अनुमति देने के बारे में अपनी सलाह दे।पीठ ने इस मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए कहा था, ‘मेडिकल बोर्ड याचिकाकर्ता की बेटी की स्थिति और गर्भपात के बारे में सलाह देगा। गौरतलब है कि भारत में 20 सप्ताह के बाद भ्रूण के समापन पर प्रतिबंध है।
चंडीगढ़ की रेप पीडि़ता को नहीं मिली थी अनुमति
बता दें कि शीर्ष अदालत ने 28 जुलाई को चंडीगढ़ की एक 10 वर्षीय गर्भवती को 32 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन से पीडि़त परिवार को एक लाख रुपए जल्द देने के लिए कहा है और शेष नौ लाख रुपए दुुष्कर्म पीडि़ता के नाम पर फिक्स्ड डिपोजिट में जमा करने को भी कहा था। बता दें कि दुष्कर्म की वजह से 10 वर्षीय बच्ची गर्भवती हो गई थी और पिछले दिनों अदालत के निर्देश के बाद पीडि़ता ने बच्ची को जन्म दिया था। बाद में बच्चे को अनाथालय में गोद देने के लिए सौंप दिया था।
पीड़िता की पहचान गुप्त
वास्तव में 32 हफ्ते की गर्भवती पीडि़ता को यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की इजाजत देने से इनकार कर दिया था कि इससे उसकी जान को खतरा था। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने साथ ही यह भी कहा है कि पीडि़ता की काउंसिलिंग उसके घर पर ही की जाए। साथ ही पीठ ने कहा कि पीडि़ता की पहचान गुप्त रखी जानी चाहिए। पीठ ने चेतावनी दी थी अगर पीडि़ता की पहचान को सार्वजनिक किया जाता है तो वह न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी।
Published on:
06 Sept 2017 03:59 pm
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