
Delhi high court
नई दिल्ली। वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध की श्रेणी में लाए जाने को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया है। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि 'विवाह के अंतर्गत दुष्कर्म' को अपराध घोषित करने से विवाह संस्था ढह सकती है। सरकार की तरफ से मंगलवार को अदालत में कहा गया कि अगर ऐसा किया गया तो पति पर दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराने की झड़ी लग जाएगी। महिलाओं द्वारा पति को प्रताड़ित करने के मामले भी बढ़ने लगेंगे। वैवाहिक जीवन की बुनियाद हिल जाएगी। केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि पति और पत्नी के बीच यौन संबंध का कोई विशिष्ट सबूत नहीं हो सकता। मामले की अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी।
सभी राज्य सरकारों से लेनी चाहिए राय
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और अन्य हाई कोर्ट पहले ही दहेज प्रताड़ना के लिए बनी आइपीसी की धारा 498ए के गलत इस्तेमाल पर टिप्पणी कर चुके हैं। ऐसे में इसे कानून की शक्ल नहीं दिया जाना चाहिए। इस संबंध में कोई निर्णय लेने से पहले सभी राज्य सरकारों को पक्षकार बनाकर उनकी राय लेनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि कहीं वैवाहिक दुष्कर्म एक चक्र न बन जाए, जिसके कारण विवाह संस्था ही प्रभावित होने लगे। हाई कोर्ट में विभिन्न संस्थाओं द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि आइपीसी की धारा 375 (दुष्कर्म) असंवैधानिक है और इसे हटाया जाए। इस संबंध में विदेश में मौजूद कानूनों के बारे में भी जानकारी दी गई।
पश्चिमी देशों की सभी व्यवस्थाएं भारत में लागू करना जरूरी नहीं
केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया कि जरूरी नहीं है कि पश्चिमी देशों में अमल में आने वाली सभी व्यवस्थाएं भारत में भी लागू की जाएं। इस संबंध में कानून बनाने से पूर्व विस्तार में यह देखना होगा कि आखिर कौन सी परिस्थिति को वैवाहिक दुष्कर्म माना जाए और किसे इससे बाहर रखा जाए।
Published on:
30 Aug 2017 12:26 pm
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