
गोवा: मछली की गुणवत्ता की जांच के लिए कोई नही है कोई अधिकारी, मत्स्यपालन मंत्री ने विधानसभा में दी जानकारी
पणजी। गोवा में मछलियों में फॉर्मलीन की खबर और दूसरी राज्यों की मछली आयात करने पर बैन लगाने की बीच एक और चौंकाने वाली खबर आई है। मत्स्य पालन (मछली पालन) विभाग के पास राज्य में बिकने वाली मछली की गुणवत्ता जांचने के लिए एक भी तकनीकी अधिकारी नहीं है। गोवा के मत्स्यपालन मंत्री विनोद पालेंकर ने गुरुवार को राज्य विधानसभा में इस बात की जानकारी दी। कांग्रेस विधायक अलेक्सो रेगिनाल्डो के एक सवाल के जवाब में पालेंकर ने कहा, "मछली की गुणवत्ता जांचने के लिए विभाग के पास एक भी तकनीकी अधिकारी नहीं है। हालांकि, शिकायत मिलने पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को इसके बारे में सूचित किया जाता है।"
जुलाई तक बाहरी मछली पर पाबंदी
बुधवार को गोवा सरकार ने दूसरे राज्य से आयात होने वाली मछलियों पर रोक लगाने के फैसला किया है। मछलियों पर प्रतिबंध जुलाई महीने के आखिर तक जारी रहेगा। बैन से राज्य में मछलियों की कमी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि गोवा के समुद्र तट पर मछलियां पकड़ने को लेकर पहले ही प्रतिबंध लगा हुआ है। गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने अपने बयान में कहा है कि, " गोवा की जनता के हित के लिए मछलियों के आयात को अगले 15 दिन के लिए बैन कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि मछली पकड़ने पर लगी रोक को अगले महीने हटा लिया जाएगा। सीएम पर्रिकर ने साथ ही ये भी दावा किया कि आयात पर रोक से मछलियों की कमी नहीं होगी। बता दें कि मछलियों के प्रजनन के समय यहां पर फीशिंग पर भी पाबंदी होती है। हालांकि मशीन बोट अगस्त में हटने वाली रोक से मुक्त हैं। मानसून आने के साथ ही हर साल की तरह 1 जून से 31 जुलाई तक राज्य में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जाती है। गोवा के तट पर हर साल यह प्रतिबंध लगाया जाता है जिससे मछलियों को प्रजनन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
फॉर्मलीन की खबरों को किया खारिज
राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने इन खबरों को निराधार बताया था। जिसमें कहा जा रहा था कि मछलियों में फॉर्मलीन पाया गया है। मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने रविवार को कहा कि लोगों को यह एहसास होना चाहिए कि फर्जी खबरें या अफवाहें हानिकारक हो सकती हैं। पर्रिकर ने इस बारे में ट्वीट किए कि वह मछली में फॉर्मलीन मुद्दे की खुद निगरानी कर रहे हैं। बता दें कि खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के मौके पर टेस्ट के बाद फॉर्मलीन की मौजूदगी बताई गई थी। बाद में एफडीए ने कहा कि मछली के नमूने में फॉर्मलीन अपने उपयुक्त स्तर पर पाया गया था और इसमें उसकी अतिरिक्त मात्रा नहीं थी। फॉर्मलीन की खबर आने के बाद तटवर्ती राज्य के लोगों ने मछली खना बंद कर दिया है।
Published on:
19 Jul 2018 09:09 pm
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