
नई दिल्ली। भारत के कई मंदिर ऐसे हैं। जिनकी भव्य इमारत देखते साथ ही आंखों को सुकुन मिलता है। ऐसा ही एक मंदिर है उत्तर भारत में , जो कि 15 बड़ी चट्टानों पर मंदिर बना है। इस मंदिर को रॉक कट टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के मसरूर गांव में स्थित हैं। इस मंदिर का मुख्य इतिहास क्या है इसको आजतक कोई नहीं बता पाया है। लेकिन मंदिर के इतिहास को लेकर कई कहानियां हैं। ऐसा कहते हैं कि आज भी इस मंदिर के गर्भ में श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के साथ विराजमान हैं। आइए आज आपको बताते हैं कि इस मंदिर से जुड़े कुछ खास रहस्य...
पुरातत्व विभाग की माने तो ये मंदिर 8वीं सदी में बना था। इस मंदिर को देखने से ही पता लगता है कि जिस तरह से इस मंदिर की नक्काशी की गई है देखकर ऐसा लगता है कि बनाने वाले ने बहुत ही ज्यादा मेहनत की होगी। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर को बनाने के लिए बाहर से कारगीर आए थे। लेकिन इस बात का भी कोई पुख्ता सुबूत नहीं हैं। मंदिर की खूबसूरती में चार चांद लगाती है मंदिर के सामने वाली मसरूर झील... जो कि दिखने में बेहद सुंदर है।
अंजता-एलोरा की गुफाएं महाराष्ट्र में मौजूद हैं। लेकिन यहां की गुफाओं को भी अजंता-एलोरा ऑफ हिमाचल भी कहा जाता है। आपको बता दें कि ये एलोरा से भी पुराने हैं। इस मंदिर रो पूरा पहाड़ काट कर गर्भ गृह, मूर्तियां, सीढ़ियां और दरवाजे बनाए गए हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था। वहीं मंदिर के सामने बनी झील को पांडवों ने अपनी पत्नी द्रोपदी के लिए बनवाया गया था।
इस मंदिर की दीवारों पर ब्रह्मा, विष्णु, महेश के अलावा कई देवी देवताओं की आकृतियां हैं। बता दें इस मंदिर को सबसे पहले 1913 में एक अंग्रेज एचएल स्टलबर्थ ने खोजा था। 8वीं सदी में बना ये मंदिर समुद्र तल से 2500 फुट की ऊंचाई पर बना हुआ है। इस मंदिर के दरवाजे विशाल पत्थरों से बने हुए हैं। ऐसा कहते हैं कि ये सिर्फ दरवाजे नहीं बल्कि स्वर्ग का द्वार है।

Published on:
21 Feb 2018 03:33 pm
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