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धूल के गुब्बार में छिप गया आसमान, कहीं बड़े रेतीले तूफान की तो नहीं है दस्तक!

Tornado Of Dust : फतेहपुर शेखावाटी में दोपहर को आया था धूल-भरा बवंडर बारिश के बाद सामान्य हुई स्थिति, डर की वजह से मार्केट की गई बंद

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Soma Roy

Jun 26, 2020

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Tornado Of Dust

नई दिल्ली। कोरोना काल (Coronavirus Pandemic) के दौरान कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं भी आ रही हैं। समुद्रीय इलाकों में आ रहे तूफान और मैदानी इलाकों में हो रहे वज्रपात की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी हैं ऐसे में फतेहपुर शेखावाटी (Fatehpur Shekhawati) में दोपहर को अचानक आए धूल के बवंडर ने सबको डरा दिया है। धूल के बवंडर (Tornado Of Dust) से पूरा आसमान ढक गया और दिन में ही अंधेरा छा गया। लोगों में अफरा-तफरी मच गई है। इस तरह उठे धूल के गुब्बार ने कैरेबियाई देशों में आए रेतीले तूफान का खतरा बढ़ा दिया है। कुछ एक्स्पर्ट्स का मानना है कि ऐसे बवंडर घातक साबित हो सकते हैं। इससे बड़ा रेतीला तूफान दस्तक दे सकता है।

बवंडर ने फतेहपुर में आफत मचाने के बाद सीकर की तरफ अपना रुख किया। हालांकि बाद में उसकी गति धीमी पड़ गई, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार बवंडर इतना खतरनाक था कि इससे कई बिजली के तार टूट गए। इतना ही नहीं डर के चलते मार्केट भी बंद कर दी गई। रास्ते में आने—जाने वाले वहीं थम गए। बवंडर ने आधे घंटे तक कोहराम मचाया। बाद में हल्की बारिश के बाद धूल का गुब्बार कुछ कम हुआ तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।

क्यों उठते हैं बवंडर?
समुद्र में तेज हवा के कारण लहरें ऊपर उठना शुरू कर देती हैं और आगे जाकर ये तूफान का रूप ले लेती हैं। ठीक वैसे ही रेगिस्तान में चलने वाली हवा से धूल के कणों की मात्रा बढ़ती जाती है। जब यह धूल आसमान में छा जाती है तब रेतीली तूफान (Dust Storm) बन जाती हैं। तेज हवा के साथ आगे बढ़ती ये धूल एक बवंडर का रूप धारण कर लेती है। रेगिस्तान में उठने वाले ये बवंडर कई बार मील लम्बे होते हैं।

हवा की नमी खत्म होने पर बनता है रेतीला तूफान
ज्यादातर रेगिस्तान भूमध्य रेखा के आस-पास है। इन क्षेत्रों में वायुमंडलीय दबाव जादा होता है। इससे ऊंचाई पर मौजूद ठंडी शुष्क हवा को जमीन तक लाता है। तभी सूरज की सीधी किरणें हवा की नमी (Moisture) को खत्म कर देती हैं। इससे हवा काफी गर्म हो जाती है। नमी के खत्म होते ही धूल के कणों की आपस में पकड़ नहीं रह पाती है। ऐसे में ये हवा के साथ बहुत ऊपर उठना शुरू कर देती है। धीरे-धीरे ये धूल कण एक बवंडर का रूप ले लेते है।

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