
यूनेस्को ने ट्वीट में यह जानकारी दी
गुरुवार को यूनेस्को ने ट्वीट कर इसकी घोषणा की।यूनेस्को की तरफ से ट्वीट में कहा गया, 'कुंभ मेला पवित्र स्नान का त्योहार है, जहां दूर-दूर से साधु, संत और टूरिस्ट पवित्र नदी में डुबकी लगाने आते हैं। ये परंपरा पूरे भारत में आस्था का विषय है।'
12 सालों में एक बार आयोजित किया जाता ये मेला
दुनिया के सबसे बड़े मेलों में से एक, इस धार्मिक मेले का आयोजन हरिद्वार और इलाहाबाद में गंगा नदी के किनारे, उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे और नासिक में गोदावरी नदी के किनारे किया जाता है। यह मेला तीन-तीन साल के अंतराल से चारों स्थानों पर क्रमवार लगता है। यानी किसी एक स्थान की बात करें तो यह मेला 12 साल के अंतराल के बाद लगता है। जिसमें करोड़ों की संख्या में अलग-अलग प्रांतो और देश विदेश के लोग हिस्सा लेते हैं।
चार से नौ दिसंबर तक चलेगा यह सत्र
यूनेस्को के अधीनस्थ संगठन इंटरगर्वनमेंटल कमिटी फोर द सेफगार्डिंग ऑफ इन्टेंजिबल कल्चरल हेरीटेज ने दक्षिण कोरिया के जेजू में हुए अपने 12वें सत्र में कुंभ मेले को 'मावनता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की प्रतिनिधि सूची' में शामिल किया। चार दिसंबर से शुरू हुआ यह सत्र नौ दिसंबर तक चलेगा।
भारत के लिए गर्व का पल: प्रधानमंत्री मोदी
कुंभ मेला को ग्लोबल इनटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज की सूची में शामिल किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी और गर्व जाहिर किया। उन्होंने यूनेस्को के ट्वीट को रीट्वीट करके कहा कि भारत के लिए यह बहुत ही गर्व और खुशी का पल है।
केंद्रीय संस्कृति मंत्री ने भी ट्वीट में जाहिर की खुशी
साथ ही केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने भी ट्वीट कर के खुशी जाहिर की है, उन्होंने ट्वीट किया, 'हमारे लिए बेहद गौरव का पल है कि यूनेस्को ने कुंभ मेला को मानवता के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के तौर पर जगह दी है। कुंभ मेला को धरती पर श्रद्धालुओं का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण जमघट माना जाता है, जिसमें जाति, पंथ के भेदभाव के बिना लाखों की संख्या में लोग हिस्सा लेते हैं।'
इससे पहले भारत के योग और नवरोज को मिली थी इस लिस्ट में जगह
आपको बात दें कि भारत की ओर से पिछले दो सालों में योग और नवरोज (पारसी नववर्ष) को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया था। इस बार भारत के कुंभ मेले के अलावा इस लिस्ट में और भी नई 33 सांस्कृतिक धरोहर शामिल की गई हैं, जिनमें बांग्लादेश के शीतल पाटी बुनाई भी है, जिसमें बांस के इस्तेमाल से चटाई बनाई जाती है.
Updated on:
09 Dec 2017 12:00 pm
Published on:
09 Dec 2017 11:53 am
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