AMERICAN PRESIDENT: अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारत के लिए कह दी ऐसी बात की चीन की उड़ गई नींद

निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद भारत के लिए ऐसी बात कह दी की चीन की नींद उड़ गई। दरअसल जो बाइडन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखने के लिए हर तरीके से साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया तो इससे चीन की नींद उड़ गई।

नई दिल्ली/ वॉशिंगटन. निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत के बाद कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री के साथ काम करने को इच्छुक हूं। कोविड-19 महामारी से निपटने, वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कदम उठाने, जलवायु परिवर्तन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखने समेत सभी साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह जानकारी बाइडन के सत्ता हस्तांतरण टीम ने दी है।

टीम ने बताया कि जो बाइडन भारत के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर काम करने के लिए काफी उत्साहित हैं। गौरतलब है कि एक दिन पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने फोन कर निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन व भारतीय मूल की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को जीत की बधाई दी थी। चुनावी नतीजे आने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली बातचीत थी। बाइडन से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने 2014 और 2016 में अमरीका की आधिकारिक यात्रा के दौरान बाइडन के साथ हुई मुलाकात को याद किया प्रधानमंत्री मोदी ने जो बाइडन से फोन पर बातचीत की जानकारी ट्वीट कर दी थी। उन्होंने भारतीय मूल की निर्वाचित उपराष्ट्रपति 'कमला हैरिस की जीत को भारतीय अमरीकी समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा की बात कही थी।

जो भारत के लिए अजनबी नहीं : विदेश मंत्री
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि बाइडन भारत के लिए कोई अजनबी नहीं हैं या दोनों देशों के बीच के संबंध से अनजान नहीं हैं। हमने बाइडन के साथ काम किया है, जब वह उपराष्ट्रपति थे, मैं ओबामा प्रशासन के अंतिम चरण के दौरान मैं वहां राजदूत के रूप में था। हम उन्हें पहले से जानते थे जब वह सीनेट की विदेश संबंध समिति में सदस्य और फिर चेयरमैन बने थे। मुझे पूरा विश्वास है कि हम फिर से वहां से अपनी रफ्तार पकड़ेगे जहां हमने छोड़ा था। दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होंगे।
48 साल से भारत समर्थक हैं बाइडन

- 1972 में बाइडन पहली बार सीनेट सदस्य चुने गए, तभी से भारत के समर्थक।
- 2008 में द्विपक्षीय असैन्य परमाणु समझौते को सीनेट से मंजूरी दिलाने में अहम भूमिका।
- 2008-16 में उप राष्ट्रपति रहते हुए भारत-अमरीका संबंधों को मजबूत करने में भूमिका निभाई
- 500 अरब डॉलर तक भारत-अमरीका व्यापार को ले जाने की बात करते रहे हैं बाइडन
- 2020 में चुनाव अभियान के दस्तावेजों में भारत से साझेदारी बढ़ाने, हर क्षेत्र में भारत के साथ खड़े होने की बात कही है।
ट्रंप से कितना अलग होंगे बाइडन
निर्वाचित अमरीकी राष्ट्रपति बाइडन की भारत को लेकर नीतियां किस तरह की रहेंगी और क्या वे डॉनल्ड ट्रंप के दौरान भारत से करीबी रिश्ते रखने की नीति पर कायम रहेंगे या नए प्रशासन में भारत के साथ अमरीका का भारत प्रति व्यवहार बदलेगा। क्योंकि ट्रंप और बाइडन अलग-अलग पर्सनैलिटी हैं। ऐसे में स्पष्ट है कि कुछ चीजों में अंतर हो सकता है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन नई दिल्ली के स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के निदेशक प्रो. हर्ष पंत का कहना है कि ट्रंप प्रशासन का चीन को लेकर रुख काफी कड़ा था। लद्दाख को लेकर ट्रंप ने खुलकर भारत का साथ दिया। लेकिन, बाइडन को लेकर आशंका है कि वह चीन को लेकर नरम रुख अपना सकते हैं।
कश्मीर, अनुच्छेद 370
कमला हैरिस भारत-अमरीका के बीच मजबूत संबंधों के लिए जानी जाती है। अनुच्छेद 370 के संशोधन के समय ट्रंप प्रशासन मौन था, लेकिन कमला हैरिस 29 अक्टूबर, 2019 को कहा कि हमें कश्मीरियों को याद दिलाना होगा कि वे दुनिया में अकेले नहीं है। हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। स्थिति बदली तो हस्तक्षेप करने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि भारत ने कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है।
एच1बी वीजा
एच1बी वीजा व इमीग्रेशन को लेकर ट्रंप की नीतियां सख्त थीं। अमरीकन फस्र्ट उनकी प्राथमिकता में थे, लेकिन बाइडन इस मामले में उदार रहे हैं। वह एच1बी वीजा की संख्या बढ़ा सकते हैं।
पाकिस्तान व आतंकवाद
पिछले 14 वर्षों से कोई भी अमरीकी राष्ट्रपति पाकिस्?तान नहीं गया है। 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश पाकिस्तान के दौरे पर गए आखऱिी अमेरिकी राष्ट्रपति थे। ट्रंप ने पाकिस्तान को दिए जाने वाले अरबों डॉलर भी रोक दिए थे। ऐसे में बाइडन की पाकिस्तान को लेकर नीतियों में क्या कोई बड़ा बदलाव आएगा?

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