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उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, खुद को घोषित किया गौवंश का कानूनी संरक्षक

मुस्लिम याचिकाकर्ता की अपील पर कोर्ट ने गौवंश की रक्षा के लिए जो ऐलान किया है, उससे हर कोई हैरान है।

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Chandra Prakash Chourasia

Aug 13, 2018

Uttarakhand High Court

उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, खुद को घोषित किया गौवंश का कानूनी संरक्षक

नई दिल्ली। एक ओर देश में गौरक्षा के नामपर हत्या हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र ऐसे लोगों से निपटने की योजनाएं बना रहा है, इसी बीच उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले सुनाया है। सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गौवंश की रक्षा के लिए खुद को कानूनी संरक्षक घोषित किया। इसके साथ ही राज्य में गौमांस और उसके उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

कोर्ट ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने हिमालयी राज्य उत्तराखंड में गायों और अन्य आवारा मवेशियों के कल्याण के लिए राज्य सरकार को 31-सूत्री दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों, पुस्तकों और धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए हरिद्वार निवासी अलीम की गौवंश की सुरक्षा से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के बाद यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया।

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उत्तराखंड में गौमांस पर भी लगा प्रतिबंध

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि राज्य में कोई भी व्यक्ति गाय, बैल, बछिया या बछड़े का वध नहीं करेगा और न ही उनका सीधे, किसी एजेंट या नौकर के माध्यम से वध के लिए निर्यात करेगा। खंडपीठ ने अपने आदेश के माध्यम से राज्य भर में गौमांस और उसके उत्पादों की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया। न्यायालय ने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि हरिद्वार जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार ने अपने जवाब में कहा है कि ‘उत्तराखंड गौ-संतति संरक्षण अधिनियम 2007’ के तहत एक पखवाड़े में दो से तीन मामले दर्ज किए जाते हैं। खंडपीठ ने इसे गौवंश के लिए चिंताजनक बताया।

राज्य सरकार को भी दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हरिद्वार जिले में ही गौवंश का वध किया जाना आम है। खंडपीठ ने राज्य के निकायों को निर्देश दिया है कि वे एक वर्ष के अंदर गौ-संतति और आवारा मवेशियों के लिए गौशाला और आश्रय स्थलों का निर्माण करें। खंडपीठ ने सभी जिलाधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि 25 गांवों के समूह में गौ-संतति के लिए एक गौशाला या गौ-सदन का निर्माण किया जाए। खंडपीठ ने कहा कि इन गौशालाओं या गौ-सदनों में बिजली-पानी की पर्याप्त व्यवस्था की जाये और इनके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाए।

मुस्लिम ने लगाई थी याचिका

गौरतलब है कि हरिद्वार निवासी किसान अलीम ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हरिद्वार के सोलापुर गडा गांव में एक व्यक्ति आवारा गाय और सांडों का वध कर रहा है। खून से गांव के जल निकाय प्रभावित हो रहे हैं जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उसने न्यायालय से इस पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।

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