अपने आपको
महसूस करेंगे कि आसमान को पारकर चांद को आसानी से हासिल कर लिया हो । 23 वर्ष तक
"चंदामामा" की चमक -धमक के कर्ता का, शताधिक कृतियों के विराट लेखक का सहज
सान्निद्य के आनंदमय क्षण आपके जीवन में अविस्मृत बन जाएंगे । उन्होंने अपने स्कूल
के चपरासी को चार-आना देकर हिंदी सीखना शुरू किया था । गांधीजी से प्रेरणा पाकर
हिंदी का प्रचार-प्रसार करने का संकल्प लेकर काशी जाकर हिंदी की उच्चशिक्षा हासिल
की थी और अपना समूचा जीवन हिंदी भाषा एवं साहित्य की सेवा को समर्पित कर दिया ।
विराट सेनानी के सामने आप बैठकर उनकी आपबीती सुनते हुए कुछ क्षण अपने आपको भूल
जाएंगे। बालशौरि जी की सहज आत्मीयता, स्नेह से गदगद होकर आप उन्हें एक अनन्य मित्र
ही मानेंगे । रेड्डी की साहित्यिक साधना की नाप-तोल कर पाना, उनकी उपलब्धियों को
चंद मिनटों में आंकने का साहस कर पाना आपके लिए सहज ही असंभव महसूस होगा । ऎसे
अन्यतम साधक के प्रति आपके मन में अनन्य श्रद्धा जरूर जागृत हो जाएगी, सरलता, सहजता
और सादगीपूर्ण उनके स्वभाव का आभास पाकर। लोकमंगल की साधना को समर्पित कलम-कर्मी के
समक्ष स्वयं रहकर भी कुछ समय अपने-आप आभासी दुनिया में भटक जाएंगे। बालशौरि रेड्डी
की सतत-साधना को चंद मिनटों में समझ पाना बेहद मुश्किल है, मगर उनकी आत्मीयता और
स्नेह हासिल करना बेहद आसान है। रेड्डी जी की जीवन-गाथा एक दीक्षाधारी साधक की
सहज-गाथा के रूप में आप पाएंगे ।