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Vizag Gas Leak: विशाखापत्तनम गैस हादसे और भोपाल गैस कांड में क्या है समानताएं?

Vizag Gas Leak: विशाखापत्तनम में एलजी पॉलीमर इंडस्ट्री से स्टीरीन गैस ( Styrene Gas ) का रिसाव विशाखापत्तन गैस रिसाव केस ने भोपाल गैस कांड ( Bhopal Gas Case ) की दिलाई याद जानिए, दोनों गैस कांड के बारे में क्या है समानता?

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Visakhapatnam V/s Bhopal gas accident

विशाखापत्तनम गैस हादसे और भोपाल गैस कांड में क्या है समानताएं?

नई दिल्ली। देश में कोरोना संकट ( coronavirus ) के बीच विशाखापत्तनम गैस हादसे ( Visakhapatnam Gas Tragedy ) से हड़कंप मच गया है। एलजी पॉलीमर इंडस्ट्री में स्टीरीन ( Styrene Gas ) नामक जहरीली गैस लीकेज से अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि पांच हजार से ज्याद लोग बीमार पड़ गए हैं और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्टीरीन गैस का असर बेहद ही खतरनाक होता है और महज 10 मिनट में मौत हो सकती है। इस गैस केस ने एक बार फिर भोपाल गैस कांड ( Bhopal Gas Case ) की याद दिला दी है। इस हादसे में हजारों लोगों की मौत हो गई थी। आइए जानते हैं दोनों हादसों के बारे में....

विशाखपत्तनम ने दिलाई भोपाल गैस कांड की याद

आंध्र प्रदेश ( Andhra Pradesh ) के विशाखापत्तनम में स्टीरीन नामक गैस लीक हुई है। इस गैस का सीधा असर दिमाग और रीढ़ की हड्डियों पर पड़ता है, जिसके कारण इंसान बेसुध होकर जहां रहता है वहीं गिर जाता है। क्योंकि, जैसे ही स्टीरीन गैस सामान्य वातावरण में प्रवेश करता है बड़ी आसानी से वह ऑक्सीजन में मिक्स हो जाता है। इसके कारण हवा में मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और इंसान के फेफड़ों पर इसका सीधा असर पड़ता है। परिणाम ये होता है कि दम घुटने के कारण मौत हो जाती है। विशाखापत्तनम की तरह भोपाल में भी यूनियम कार्बाइड फैक्ट्री में करीब 36 साल पहले एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। इस हादसे में हजारों लोगों की मौत हुई थी और आज तक इसका असर देखा जा सकता है।

दोनों गैस रिसाव कांड में आंखों और फेफडों पर असर

भोपाल गैस त्रासदी कांड में 'मिथायल आइसोसाइनाइड' नामक गैस का रिसाव हुआ था। गैस का रिसाव होते ही पूरे शहर में काले बादल की तरह यह गैस छा गया। इसका असर सीधे लोगों के फेफड़ों और आंखों पर हुआ था और दम घुटने के कारण करीब 15 हजार लोगों के मरने का दावा किया गया था। हालांकि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 3787 लोगों की मौत हुई थी। हैरानी की बात ये है कि इस हादसे में जो लोग बच गए उनका फेफड़ा कमजोर हो गया। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि भोपाल गैस कांड से प्रभावित लोग अब भी कैंसर, ट्यूमर, सांस और फेफड़ों जैसी खतरनाक बीमारियों से जूझ रहे हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि विशाखापत्तनम गैस हादसे से कहीं ज्यादा खतरनाक था भोपाल गैस त्रासदी कांड। इन दोनों गैस रिसाव केस में इंसानों के फेफड़े और आंखों पर सीधा असर पड़ा है।