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आखिर क्यों 94 वर्षीय करुणानीधि को दफनाया जाएगा ?

हिन्दू रीतिरिवाज में शव को दफनाने की बजाय अंतिम संस्कार किया जाता है
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नई दिल्ली

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Mohit Saxena

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Updated: 8 Aug 2018, 9:10 AM IST

m karunanidhi

आखिर क्यों 94 वर्षीय करुणानीधि को दफनाया जाएगा

नई दिल्ली। जयललिता की ही तरह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि को भी दफ़नाया जाएगा। मंगलवार शाम करुणानिधि का चेन्नई के कावेरी अस्पताल में निधन हो गया। वे 94 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनकी हालात अचानक मंगलवार को बिगड़ गई थी। करुणानिधि को पूरे सम्मान के साथ दफनाने की तैयारियां शुरू चुकी हैं। मगर सवाल यह उठता है कि हिन्दू रीतिरिवाज में शव को दफनाने की बजाय अंतिम संस्कार किया जाता है। इससे पहले जयललिता के निधन के समय भी ये सवाल उठाए गए थे कि जयललिता का दाह संस्कार क्यों नहीं किया गया।

द्रविड़ आंदोलन से जुड़ा होना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी वजह जयललिता का द्रविड़ मूवमेंट से जुड़ा होना था। द्रविड़ आंदोलन हिंदू धर्म के किसी ब्राह्मणवादी परंपरा और रस्म में यक़ीन नहीं रखता है। उनका कहना है कि द्रविड़ हिंदू परंपरा पर विश्वास नहीं करते हैं। वे धार्मिक रीति—रिवाजों पर विश्वास करने की बजाय तर्क को ज्यादा अहमियत देते हैं। वह अपने आप को हिन्दू से अलग समझकर सारे रीतिरिवाज को अपनी तरह से मानते हैं।

ब्राह्मणवाद का विरोध

जयललिता भी एक द्रविड़ पार्टी की प्रमुख थीं, जिसकी नींव ब्राह्मणवाद के विरोध के लिए पड़ी थी। चूँकि करुणानिधि भी इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं इसलिए उन्हें भी दफ़नाया जाएगा।विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य हिंदू परंपरा के ख़ि़लाफ़ द्रविड़ मूवमेंट से जुड़े नेता अपने नाम के साथ जातिसूचक टाइटल का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। जयललिता से पहले एमजी रामचंद्रन को भी दफ़नाया गया था। उनकी क़ब्र के पास ही द्रविड़ आंदोलन के बड़े नेता और डीएमके के संस्थापक अन्नादुरै की भी क़ब्र है। अन्नादुरै तमिलनाडु के पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री थे। एमजीआर पहले डीएमके में ही थे लेकिन अन्नादुरै की मौत के बाद जब पार्टी की कमान करुणानिधि के हाथों चली गई तो कुछ सालों के बाद वो पुराने राजनीतिक दल से अलग हो गए और एआईएडीएमके की नींव रखी।

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