8 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

डॉक्टर ने बच्ची की लाइलाज बीमारी को बताया था मामूली, खुलासा होने पर मां ने उठाया ये कदम

अपनी बच्ची के लिए न्याय की मांग करते हुए महिला ने सीधे-सीधे कह दिया कि मैं बच्ची को यहीं छोड़ जाउंगी।

2 min read
Google source verification

image

Navyavesh Navrahi

Feb 23, 2018

Women seeking justice

पत्रिका ब्यूरो, देहरादून। एक मां अपनी बच्ची के लिए न्याय की मांग करते हुए बृहस्पतिवार को भाजपा जनता दरबार में बच्ची के साथ पहुंच गई। इसके बाद बच्ची को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के समक्ष रखते हुए न्याय की गुहार करने लगी। इतने पर भी बात नहीं बनीं तो महिला ने सीधे-सीधे कह दिया कि मैं बच्ची को यहीं छोड़ जाउंगी और धरने पर भाजपा जनता दरबार के बाहर धरने पर बैठ गई। इस बीच उसने बच्ची पुलिस वालों को दे दी, जो कि बच्ची को संभालती नजर आई।

डॉक्टर ने गंभीर बीमारी को मामूली बताया था
दरअसल, नौ माह पूर्व कुमकुम नाम की महिला ने प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्टर अर्चना लूथरा से ट्रिपल टेस्ट करवाया। इसके बाद डॉक्टर ने हाई रिस्क होते हुए भी रिपोर्ट ध्यान से नहीं पढ़ी और लो रिस्क बता दिया। इसके बाद लाइलाज बीमारी डाउन सिण्ड्रोम से पीड़ित बच्ची पैदा हुई। इस संबंध में महिला ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को कंप्लेन की। इसकी जांच के लिए सीएमओ ने जांच समिति गठित की। जांच में डॉक्टर अर्चना दोषी पाई गईं। इसके बावजूद उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार वाय एस विष्ट इस मामले को लगभग आठ माह से टाल रहे थे। जिसके कारण आगे की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है। इसके चलते महिला को न्याय नहीं मिल पा रहा है और महिला यह कदम उठाने को मजबूर हुई।

मेडिकल रिपोर्ट में डॉक्टर को बताया गया था निर्दोष
मीडिया की मौजूदगी में जब महिला ने पूरा वाक्या सुबोध उनियाल को कह सुनाया तो उन्होंने खुद ही वाय एस विष्ट को फोन मिला दिया। इसके बाद महिला के ससुर ने जाकर वाय एस विष्ट से इस संबंध में रिपोर्ट प्राप्त की। उत्तराखंड़ मेड़िकल काउंसिल कि रिपोर्ट देखकर तो मानो सब सकते में आ गए। रिपोर्ट में डॉक्टर अर्चना लूथरा को निर्दोष करार दिया गया है।

न्याय के लिए मेड़िकल काउंसिल ऑफ इंडिया जाएंगी कुमकुम
पत्रिका ने इस संबंध में कुमकुम से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि जिस डॉक्टर को मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जांच कमेटी ने दोषी करार दिया है, उसे उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल द्वारा निर्दोष करार दिया गया है। इसके बावजूद वह हार नहीं मानते हुए अब इस मामले में न्याय के लिए मेड़िकल काउंसिल ऑफ इंडिया जाएंगी।