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भारत के करीब 70 फीसदी हिस्से में जल संकट, पहाड़ों में ज्यादा बड़ी है समस्या

पिछले कुछ दिनों से हिमाचल की राजधानी शिमला और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में जल संकट देखने को मिल रहा है।

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Kapil Tiwari

Jun 05, 2018

Water Crises

Water Crises

नई दिल्ली। पानी अनमोल है और लोगों से इसे बचाने की अपील समय-समय पर की जाती रही है। हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में जब पानी का संकट खड़ा हुआ था तो दुनिया भर में जल संकट को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। केपटाउन के अंदर हालात ऐसे हो गए थे कि इंडियन क्रिकेट टीम को भी होटल में कम पानी इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था। इस बीच हिंदुस्तान में भी पानी का संकट खड़ा हो गया है।

शिमला में जल संकट
हैरानी वाली बात ये है कि पहाड़ी इलाकों मे पानी की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों में हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में पानी का संकट देखने को मिला है। पहले बात करते हैं पहाड़ों की रानी हिमाचल की राजधानी शिमला की, जहां पर पिछले कुछ दिनों से जल संकट खड़ा हो गया। इस वजह से वहां पर आम जन-जीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। शिमला के अंदर लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है और ऐसे में वहां के टूरिज्म पर इसका बुरा असर पड़ा है। होटल मालिकों ने सभी टूरिस्टों की बुकिंग को भी कैंसिल कर दिया है।

सरकार के खिलाफ हो रहे हैं प्रदर्शन
वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार को भी पानी के संकट की समस्या की वजह से लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। लोग विरोध, धरना-प्रदर्शन सब कर रहे हैं, लेकिन हालात अभी बदले नहीं हैं। लोगों को घंटो पानी के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है। शिमला में पानी की भारी कमी को देखते हुए कई निगम अधिकारियों को उनके पदों से भी बर्खास्त किया गया है। वहीं चीन दौरे पर गईं शिमला की महापौर कुसुम सदरेट भी दौरे के बीच में ही छोड़कर वापस लौट आईं।

उत्तराखंड में पीने के पाने की तरस रहे हैं लोग
शिमला की तरह उत्तराखंड के भी कई इलाकों में पानी की समस्या से लोग बेहाल हैं। गढ़वाल के त्यूनी इलाके में लोगों को पानी की समस्या से जूझना पढ़ रहा है। त्यूनी के मेंद्रथ गांव में पिछले 10 दिनों से पीने के पानी की समस्या बेहद गंभीर है। सोमवार को तो यहां लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने गांव में ही जल संस्थान और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। हालांकि बताया जा रहा है कि इस गांव पानी का संकट किसी लापरवाही की वजह से हो रहा है। जानकारी के मुताबिक, दो दशक पूर्व गांव के लिए समाड़ा खड्ड से पेयजल लाइन बिछाई गई थी। वर्तमान में लाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त है। पेयजल लाइन के रखरखाव का जिम्मा ग्राम पंचायत के पास है, लेकिन ग्राम पंचायत के पास इतना बजट नहीं कि वह लाइन की मरम्मत करा सके। अब गर्मी बढ़ाने के साथ ही जलस्रोत में पानी का स्तर कम हो रहा है। जिससे गांव में पानी का संकट होने लगा है।

देश का 60 से 70 फीसदी हिस्से में पानी की कमी
पानी की कमी से सिर्फ पहाड़ों में ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी लोग परेशान हैं। मौजूदा समय में देश के 60 से 70 फीसदी हिस्से में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। 1997 के बाद से अब तक देश का 57 प्रतिशत हिस्सा सूखा प्रभावित हो गया है। इतना ही नहीं देशभर में करीब 50 लाख झरने और जल स्त्रोत हैं जिनमें से अकेले 30 लाख हिमालय के क्षेत्र में हैं, बावजूद इसके इनमें से ज्यादातर झरने और जल स्त्रोत पानी की बढ़ती मांग, जमीन का गलत इस्तेमाल और पर्यावरण के गिरते स्तर की वजह से तेजी से सूख रहे हैं।