शोध : टोलेडो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का प्रयोग
वॉशिंगटन. अमरीका में टोलेडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पहली बार बताया है कि इंजीनियर्ड बैक्टीरिया से रक्तचाप को कम करने में कामयाबी हासिल की है। यह अपूतपूर्व खोज उच्च रक्तचाप के संभावित उपचार की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। हाल ही पीयर रिव्यू जर्नल में प्रकाशित इस शोध की लेखिका डॉ. बीना जो ने बताया कि अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि बीमारियों उपचार में माइक्रोबायोटा (आंत का बैक्टीरिया) का उपयोग किया जा सकता है, जो आमतौर पर उच्च रक्तचाप में भूमिका निभाता है। अब पहली बार हम इस नतीजे पर पहुंचे है कि वास्तव में ऐसा संभव है। डॉ. जो ने कहा, उच्च रक्तचाप में उपचार के लिए एक आशा की किरण है, जिससे ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए पारंपरिक दवाओं की आवश्यकता नहीं होगी। अनियंत्रित रक्तचाप दिल का दौरा, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी के लिए बड़ा जोखिम पैदा करता है। यूटोलेडो कॉलेज ऑप मेडिसन एंड लाइफ सांइसेज में फिजियोलॉजी की प्रमुख डॉ. जो की टीम ने आंत के जीवाणु लैक्टोबैसिलस पैरासेसी का परीक्षण किया।
चूहों पर किया प्रयोग
प्रयोगशाला में प्रोबायोटिक के रूप में चूहों को इंजीनियर्ड बैक्टीरिया लैक्टोबेसिलस पैराकेसी खिलाकर शोधकर्ताओं ने उनकी आंतों में एसीई2 एंजाइम भेजा। इस चूहे की आंत में एंजियोटेंसिन 2 को कम कर दिया और इससे रक्तचाप कम हो गया। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि रक्तचाप कम करने का प्रभाव केवल मादा चूहों में नजर आया। एसीई2 कोविड-19 महामारी के दौरान वायरस के लिए प्रमुख रिसेप्टर के रूप में भूमिका निभाई थी।
अन्य बीमारियों में भी कारगर
डॉ. बीना जो ने कहा, बैक्टीरिया से अन्य बीमारियों से भी निजात मिल सकती है। मसलन, शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल है तो बैक्टीरिया से एक प्रोटीन बना सकते हैं, जो ब्लड शुगर को कम कर सकता है।