
नई दिल्ली। अगर आप में कुछ करने की चाह है। उस काम को करने के लिए जुनून है। खुद पर विश्वास है। इरादा मजबूत है और मेहनत के लिए तैयार हो, तो आप किसी भी चीज को पाने में काबिल हैं। आपको याद होगा जब 2010 में आर्थिक मंदी के कारण कई लोगों ने अपनी नौकरियां गंवाई थी। लंदन के सुजय साहनी भी उन्हीं लोगों में से एक थे जिन्हें अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। सुजय उस समय एक फाइव स्टार होटल में बतौर फूड एंड बैवरेज मैनेजर के तौर पर काम करते थे। लेकिन मंदी के कारण उन्हें अपनी जॉब गंवानी पड़ी। सुजय खुद कहते हैं कि वह दौर एक ऐसा पीरियड था उनका गुजारा भी बहुत मुश्किल से हो रहा था।
दोस्त से लगानी पड़ी थी मदद की गुहार
कहते है ना कि भगवान बस आपकी परीक्षा लेता है। लेकिन अगर आपका दिल सच्चा हो, तो वह सब कर देता है। ऐसे वक्त में जब सुजय इधर-उधर भटक रहे थे, तो उन्होंने अपने कॉलेज के दोस्त, सुबोध जोशी से मदद मांगी। सुजय ने अपने दोस्त से कहा कि क्या वह उनकी मदद कर सकता है? क्योंकि उनके पास वड़ा पाव खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। लेकिन किसने सोचा था, यह डायलॉग ही उन दोनों की ज़िन्दगी बदल देगा। थोड़े दिनों बाद ही सुजय को एक दमदार आइडिया आया कि क्यों ना लंदन की सड़कों पर वड़ा पाव बेचा जाए? आइडिया तो आ गया लेकिन उसे किस तरह से लागू करेंगे इसकी कोई तरकीब नहीं थे लेकिन पर इतना था कि अब इसे पूरा करना है। लंदन शहर में ऐसी जगहें ढूंढी जहां पर वे अपना स्टॉल लगा सकते थे।
शुरुआत में बिना मुनाफे के किया काम
सुजय बताते हैं कि उन्हें हॉउनस्लो नाम की एक अच्छी जगह लगी, क्योंकि वहां साउथ- ईस्ट एशिया के काफ़ी लोग आते थे। हमने सोचा कि हम यही पर अपना स्टॉल लगाते हैं। वहां हमें एक पॉलिश कैफे दिखा जो कि उतना बिज़नेस नहीं कर रहा था। हमने उस कैफे के मालिक से बात की और उन्होंने हमें दो टेबल लगाने की इजाज़त भी दे दी। हमने उसे लगभग 35000 रुपये महीने देने का वादा भी किया था। हमने 15 अगस्त, 2010 को लंदनवासियों के लिए अपना स्टॉल खोल दिया था। सुजय बताते हैं कि हमने सबसे पहला वड़ा पाव लगभग 80 रुपये बेचा। शुरुआत में मुनाफा बिल्कुल न के बराबर था लेकिन बाद में सब ठीक हो गया।
Published on:
06 Oct 2017 12:09 pm

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