
टोकियो। जापान में 2011 में आए भयानक भूकंप ने जिंदगियां तबाह कर दी थी। अब उसका ही असर है कि अभी तक लोगों का जीवन पुराने ढर्रे पर लौट नहीं पाया है। जब 2011 में ये बड़ा भूकंप आया, तो यह जापानी मछुआरे सामान्य रूप से समुद्र के पास में काम कर रहे थे लेकिन उसके बाद उनकी जिंदगी सामन्य नहीं हो पाई। जापान के पूर्वोत्तर तट पर हजारों मछुआरों ने पिछले सात सालों में अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया है लेकिन विशाल समुद्र की दीवारों के साथ जीवन गुजारने से नाखुश हैं।
मछुआरों को चिंता है कि ये दीवारें प्राकृतिक जल प्रवाह को रोकती हैं जिसके चलते सीप की खेती पर प्रभाव पड़ेगा। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह दीवार आवश्यक है और लोगों को आने वाले सूनामी जैसी आपदाओं से बचाएगा। बता दें कि जापान की एक भूकंपीय सक्रिय राष्ट्र है जहां ऐसे कदम अनिवार्य माना गया है। 2011 के भूकंप और सूनामी से पूरे जापान में लगभग 18,000 लोगों की मौत हो गई और इससे फुकुशिमा विद्युत संयंत्र में परमाणु मंदी की शुरुआत की। जबकि निवासियों को दीवार के पीछे के विचार को समझना पड़ता है, वहीं समय के साथ कई और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।