
वाशिंगटन।अमरीका जल्द ही मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित कर सकता है। 1928 में मिस्र में स्थापित इस संगठन के ऊपर कार्रवाई करने का अमरीका पर भारी दबाव है। दुनिया भर में शांतिपूर्ण तरीकों से इस्लामी खिलाफत स्थापित करने की मांग के बदले मुस्लिम ब्रदरहुड आतंकवादियों के लिए एक प्रजनन स्थल रहा है। अमरीकी प्रशासन ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकवादी संगठन घोषित करने के प्रस्ताव को ट्रंप ने जनवरी 2017 में स्वीकार किया था। 2019 में मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्यों की संख्या 1 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
आतंकवादी संगठन घोषित होगा मुस्लिम ब्रदरहुड
अमरीका का मानना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड के आतंकवादी संगठनों से भी संबंध हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन मुस्लिम ब्रदरहुड को एक विदेशी आतंकवादी संगठन नामित करने के लिए काम कर रहा है। वाइट हाउस ने मंगलवार को कहा कि वह मिस्र के सबसे पुराने इस्लामी आंदोलन के खिलाफ प्रतिबंधों का एलान करेगा। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस आशय का अनुरोध किया था। 9 अप्रैल को इस्लामिक गणराज्य मिस्र के राष्ट्रपति के साथ बैठक के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने "महान राष्ट्रपति" के रूप में अलसीसी की प्रशंसा की। जबकि अमरीकी सांसदों के एक समूह ने मानवाधिकारों पर अल सीसी के रिकॉर्ड पर चिंता व्यक्त की थी।
वाइट हाउस के फैसले के पीछे क्या है वजह
2013 में मुस्लिम ब्रदरहुड के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को अपदस्थ करने वाले और अगले वर्ष राष्ट्रपति चुने जाने वाले सिसी ने इस्लामवादियों की कटु आलोचना की है। उधर वाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन और राज्य के सचिव माइक पोम्पिओ ने मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित करने के फैसले का समर्थन किया है, लेकिन पेंटागन और अन्य विभागों के अधिकारियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है और सीमित कार्रवाई की मांग की है।
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड
मुस्लिम ब्रदरहुड जो 1 मिलियन लोगों को अपनी सदस्यता का दावा करता है, 2012 में मिस्र के पहले मुक्त चुनाव में सत्ता में आया था। लंबे समय तक मिस्र के राष्ट्रपति रहे होस्नी मुबारक के खिलाफ लोकप्रिय विद्रोह के दौरान यह शीर्ष पर बना रहा। लेकिन उसके बाद इसके बुरे दिन शुरू हो गए। कटटरपंथी इस्लाम को बढ़ावा देने के आरोप में इस संंगठन पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके हजारों समर्थकों और इसके नेतृत्व को जेल में डाल दिया गया है। मिस्र की सरकार ने 2013 में एक आत्मघाती बम हमले के लिए इस संगठन को दोषी ठहराया था। इस हमले में 16 लोगों की मौत हो गई थी । ब्रदरहुड ने उस हमले की निंदा की और हिंसा से इनकार किया। माना जा रहा है कि अगर अमरीका ने इस संघठन पर बैन लगाया तो नाटो सहयोगी तुर्की के साथ वाशिंगटन के रिश्ते जटिल हो सकते हैं। राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन की सत्तारूढ़ एके पार्टी के साथ मुस्लिम ब्रदरहुड के घनिष्ठ संबंध हैं और इसके कई सदस्य मिस्र में समूह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगने के बाद तुर्की भाग गए थे।
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Updated on:
01 May 2019 05:50 pm
Published on:
01 May 2019 01:10 pm

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