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आजम खान के करीबियों पर हाईकोर्ट की मार, 15 पर अब भी लटकी तलवार

हाईकोर्ट ने आजम खान के करीबी तत्कालीन डीएम राजीव रौतेला और राकेश सिंह को निलंबित किया

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moradabad

रामपुर। विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में कुर्सी की रस्सा कस्सी के बीच जो बवाल मचा था, वो तो जग जाहिर है। लेकिन इसी विवाद के बाद यूपी की सत्ता हारे एसपी के नेताओं समेत उनके करीबियों पर कानून के हंटर का दौर लगातार जारी है। इसी कड़ी में अब तत्कालीन डीएम राजीव रौतेला और राकेश सिंह पर गाज गिरी है। बता दे कि तत्कालीन डीएम राजीव रौतला सपा के कद्दावर नेता आजम खान के बेहद करीबी माने जाते है। लेकिन एक किसान मकसूद की शिकायत के बाद उन्हें सस्पेड कर दिया गया। जबकि 15 अधिकारियों पर निलंबन की तलवार लटकवा दी है।

आखिर क्या है मामला ?
दरअसल पूर्व की सरकार में ज़िले की तहसील स्वार टांडा के दण्डियाल में अवैध खनन को लेकर मकसूद नाम का शख्स ने ज़िला अधिकारी से लेकर खनन अधिकारी के यहां शिकायत की थी। लेकिन अफसरों ने उसकी शिकायत को नज़र अंदाज़ करते हुए शिक़ायत पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिसको लेकर पीड़ित मकसूद ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और हाईकोर्ट में जब सुनबाई हुई तब कोर्ट ने डीएम राकेश सिह और राजीव रौतेला को फटकार लगाते हुए सस्पेंड कर दिया। वहीं इस मामले में तत्कालीन खनन अधिकारी, पुलिस चौकी प्रभारी समेत 15 अफसरों पर जांच बैठा दी है। जिसको लेकर 16 जनवरी 2018 को मामले की अगली सुनवाई होगी।

कौन है पीड़ित मकसूद ?
बता दें कि पीड़ित मकसूद दण्डियाल के रहने वाले हैं, जिनकी जमीन पर लंबे समय से अवैध खनन हो रहा था। इसी लेकर पीड़ित ने कई बार आवाज भी उठाई। लेकिन माफियाओं ने पीड़ित पर फायरिंग करवा कर उसे घायल कर दिया। जिसके बाद पीड़ित कई दिन तक अस्पताल में रहा और इलाज़ के बाद अफसरों से फिर शिकायतें की। लेकिन उसकी शिकायतें प्रशासन ने नज़र अंदाज़ कर दी। लेकिन मकसूद ने हिम्मत नहीं हारी और वो हाईकोर्ट से उम्मीद लगाकर केस की पैरवी करने जा पहुंचा। जहां से पीड़ित मकसूद को बड़ी कामयाबी मिली ।

आजम खान के करीबी हैं आरोपी
गौरतलब है कि सपा सरकार में राजीव रौतेला और राकेश सिंह आज़म खान साहब के बेहद करीबी माने जाते थे। हालांकि एक दिन आज़म खान ने दोनों ही अधिकारियों को इसके खिलाफ चेतावनी दी थी, और ज़िले में गड़बड़ी करने वाले को बख्शे नहीं जाने की बात कहकर आरोपी अधिकारियों का अलग जगह ट्रांसफर भी कर दिया गया। बावजूद इसके अधिकारियों की दबंगई जारी रही।

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